Rising Cancer Patients: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में जीरन तहसील में बेहद गंभीर और महंगी खर्चों वाली बीमारी कैंसर के मरीज ्अचानक तेजी से बढ़ गए हैं. बेहद ही गंभीर और चिंताजनक यह मामला एक विशेष गांव से जुड़ा है, जहां बहुतायत में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. घबराए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

Neemach Horror Cancer Story: नीमच में कैंसर की समस्या
लगातार सामने आ रहे हैं गांव में कैंसर के मरीज
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कैंसर के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं, सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह बीमारी किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है. गांव में महिला, पुरुष, युवा, बच्चे और बुजुर्ग तक कैंसर से प्रभावित हो रहे हैं. वर्तमान में गांव के एक इलाके में करीब एक दर्जन से अधिक मरीज कैंसर से जूझ रहे हैं, जबकि कई लोगों की मौत भी हो चुकी है.
गांव के एक इलाके में ज्यादा मरीज
ग्रामीणों के अनुसार कैंसर के अधिकांश मामले गांव के एक सीमित हिस्से में ज्यादा सामने आ रहे हैं. इलाके के लोगों का दावा है कि लगभग 200 मीटर के दायरे में ही 15 से 20 मरीज मिले हैं, जिसमे कुछ मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों का इलाज अभी भी जारी है. ग्रामीणों को आशंका है कि इसके पीछे दूषित पानी, कीटनाशकों और रासायनिक पदार्थों का अत्यधिक उपयोग या फिर मोबाइल टावर का रेडिएशन कारण हो सकता है. हालांकि ग्रामीणों ने इसकी वैज्ञानिक जांच की मांग की है और प्रशासन से सच्चाई सामने लाने की मांग की है.

Neemach Horror Cancer Story: स्वास्थ्य केंद्र
इलाज करवाते-करवाते मर रहे परिवार
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने गांव के गरीब और मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बुरी तरह प्रभावित कर दी है. अधिकांश मरीजों का इलाज राजस्थान के उदयपुर और गुजरात के अहमदाबाद के अस्पतालों में चल रहा है. कई परिवार मजदूरी या छोटे-मोटे काम पर निर्भर हैं, ऐसे में बार-बार बड़े शहरों में इलाज करवाने जाना उनके लिए भारी आर्थिक बोझ बन गया है.
फोर्थ स्टेज कैंसर से जूझ रहे असलम
गांव के रहने वाले असलम मंसूरी मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं और अब बीमारी फोर्थ स्टेज तक पहुंच चुकी है. हालत इतनी गंभीर हो गई है कि उन्हें बोलने में भी दिक्कत हो रही है. असलम की पत्नी जैना बी बताती हैं कि 3 साल पहले बीमारी का पता चला था. इसके बाद उदयपुर और अहमदाबाद में इलाज करवाया गया, लेकिन बीमारी लगातार बढ़ती गई. अब परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से टूट चुका है.
नवीन जुनी ने शुरू की कैंसर के खिलाफ मुहिम
कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी से जूझ रहे पूरे के पूरे गांव की आर्थिक मदद दिलाने और मामले को प्रशासन तक पहुंचाने की शुरुआत गांव के नवीन जुनी ने की. नवीन गांव में चाय की टपरी लगाकर परिवार चलाते हैं. 10 महीने पहले उनकी 26 वर्षीय बेटी वनीषा को “सारकोमा” कैंसर होने का पता चला था.इलाज के लिए कई जगह प्रयास किए गए, लेकिन आखिरकार बेटी जिंदगी की जंग हार गई.
मेरी बेटी की तरह किसी और की जान न जाए
नवीन जुनी का कहना है कि उनकी बेटी की मौत ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया. वे नहीं चाहते कि किसी दूसरे परिवार को भी वही दर्द झेलना पड़े. उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच और स्वास्थ्य सर्वे शुरू हो जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है. नवीन प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि गांव में कैंसर स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएं और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए.

चार साल की बच्ची को ब्लड कैंसर
गांव के ही मनोहर लाल ने बताया कि उनकी करीब चार वर्षीय पोती ब्लड कैंसर से पीड़ित है. लंबे समय से इलाज चल रहा है और परिवार मजदूरी पर निर्भर होने के कारण भारी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है. पीड़ित मनोहर लाल का कहना है कि गांव में लगातार कैंसर मरीज बढ़ रहे हैं और इसकी वास्तविक वजह सामने आना बेहद जरूरी है.
स्वस्थ जीवनशैली के बावजूद कैंसर से मौत
नवीन शर्मा की टपरी के पास रहने वाले वृद्ध पंडित रामलाल शर्मा की भी करीब दो महीने पहले कैंसर से मौत हो गई. परिजनों के अनुसार वे पूरी तरह स्वस्थ थे और नियमित व्यायाम व अच्छी दिनचर्या अपनाते थे.अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अहमदाबाद ले जाया गया, जहां जांच में पेनक्रियाटिक कैंसर होने की पुष्टि हुई. कुछ ही समय में उनका निधन हो गया.
नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत दिनों कुछ ग्रामीणों के द्वारा उन्हें जनसुनवाई में एक ज्ञापन दिया गया था, जिसमें गांव में लगातार कैंसर पीड़ितों के बढ़ने की बात कही गई थी. इस मामले में चिकित्सा विभाग को आदेशित किया गया है कि वह गांव में जाकर जांच करें. इस संबंध में विभिन्न विभाग की एक टीम बनाई गई है, टीम गांव में जाकर सर्वे करेगी, साथ ही गांव में कुल कितने मरीज हैं और मरीज के बढ़ने के कारण को लेकर विस्तृत जांच की जाएगी.
चीताखेड़ा का मामला अब केवल स्वास्थ्य का नहीं
गौरतलब है चीताखेड़ा का मामला अब केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि संभावित पर्यावरणीय खतरे का विषय बनता जा रहा है, यदि एक ही इलाके में लगातार कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं, तो इसकी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी हो जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है.
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें-
- ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के सभी जल स्रोतों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए.
- पूरे गांव में स्वास्थ्य सर्वे और कैंसर जांच शिविर लगाए जाएं.
- मिट्टी और पानी की लैब जांच हो.
- कीटनाशकों और रासायनिक पदार्थों के उपयोग की जांच की जाए.
- मोबाइल टावर के रेडिएशन स्तर की जांच कराई जाए.
- प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और निशुल्क उपचार मिले.
- बड़ा सवाल: आखिर इस इलाके में क्यों बढ़ रहे कैंसर के मामले?
ये भी पढ़ें-VIDEO: कांग्रेस नेता का अनूठा प्रदर्शन, 30 करोड़ रुपए की लागत से तैयार जर्जर सड़क पर बैठकर कराया मुंडन