मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की सरकारी खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. इस बार आगर-मालवा जिले में खरीदी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने एक अहम और प्रेरणादायक फैसला लिया है. जिले के कुल 42 उपार्जन केंद्रों में से 13 केंद्रों की पूरी जिम्मेदारी महिला स्वसहायता समूहों को सौंपी गई है. यह कदम सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में महिलाओं की बदलती भूमिका का जीवंत उदाहरण बन रहा है.
कलेक्टर प्रीति यादव की पहल: सशक्तिकरण का नया मॉडल
आगर-मालवा जिला कलेक्टर IAS प्रीति यादव ने NDTV से चर्चा में बताया कि खरीदी को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सभी केंद्रों पर लगातार मॉनिटरिंग के साथ किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि महिला समूहों को इस प्रक्रिया में शामिल करने का उद्देश्य सिर्फ काम बांटना नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण को जमीन पर उतारना है. महिला समूहों द्वारा संचालित केंद्रों पर पारदर्शिता, जिम्मेदारी और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा. इन समूहों को वेयरहाउस वाले केंद्र ही दिए गए हैं, ताकि उन्हें किसी तरह का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े.

अब नारी नहीं किसी से कम: MSP खरीदी केंद्रों पर महिलाएं बनेंगी सिस्टम की नई ताकत Photo Credit: JAFFER MULTANI
135 महिलाओं का आत्मविश्वास: अब वे बनेंगी बदलाव की पहचान
उपार्जन के नोडल अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ बीएस सोलंकी ने बताया कि पिछले साल भी 13 केंद्रों पर महिला समूहों को जिम्मेदारी दी गई थी, जो पूरी तरह सफल रही. इस बार भी 13 समूहों की 135 महिलाएं खरीदी केंद्रों का संचालन करेंगी. ये महिलाएं न सिर्फ किसानों से गेहूं खरीदेंगी, बल्कि अपने आत्मविश्वास, मेहनत और हुनर से पूरे सिस्टम को नई दिशा देंगी. यह पहल महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक सम्मान भी लेकर आएगी. परिवार और समाज में उनकी भूमिका और मजबूत होगी.
+

खेत से केंद्र तक नारी शक्ति: MSP खरीदी में महिलाएं लिखेंगी आत्मनिर्भरता की नई कहानी Photo Credit: JAFFER MULTANI
“जब नारी को मौका मिलता है, तो वो इतिहास लिखती है”
सीईओ सोलंकी ने कहा कि जिले की महिलाएं अब केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं. वे स्वसहायता समूहों के माध्यम से खुद की आजीविका चला रही हैं और अब प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं. उन्होंने कहा कि ये महिलाएं सिर्फ केंद्र नहीं चला रहीं, बल्कि समाज में एक नया संतुलन स्थापित कर रही हैं. यह उदाहरण दिखाता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं जिम्मेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाती हैं.

महिलाओं के हाथ में खरीदी की कमान: MSP केंद्रों से उठेगी गांव की तरक्की की नई लहर Photo Credit: JAFFER MULTANI
किसानों का बढ़ा भरोसा, रिकॉर्ड पंजीयन
जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी एमएल मालवीय के अनुसार, इस वर्ष जिले में 42,902 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है. पिछले साल यह संख्या करीब 32 हजार थी. करीब 10 हजार अधिक पंजीयन इस बात का संकेत है कि किसानों का सरकारी खरीदी व्यवस्था पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
एमपी में गेहूं खरीदी लक्ष्य और व्यवस्थाएं
आगर-मालवा जिले में 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए 8,800 गठान बारदान की आवश्यकता है, जिसमें से 2,384 गठान मिल चुकी हैं और 797 गठान केंद्रों तक पहुंचाई जा चुकी हैं. भंडारण की समस्या से निपटने के लिए बड़ौद के कंकडेल गांव में 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला साइलो केंद्र भी स्वीकृत किया गया है. इससे भविष्य में भंडारण और बारदान की समस्या काफी हद तक कम होगी.

अब महिलाएं करेंगी गेहूं खरीदी: MSP केंद्रों से गांवों में आएगा सशक्तिकरण का नया दौर
Photo Credit: JAFFER MULTANI
महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल
आगर-मालवा में यह पहल केवल गेहूं खरीदी तक सीमित नहीं है. यह महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और आत्मिक विकास की दिशा में बड़ा कदम है. महिलाएं अब सिर्फ भागीदारी नहीं, बल्कि नेतृत्व कर रही हैं. यह बदलाव गांवों की तस्वीर बदल रहा है और प्रदेश के सर्वांगीण विकास को नई गति दे रहा है.
किसानों की उम्मीद: समय पर मिले भुगतान
किसानों में खरीदी को लेकर उत्साह है, लेकिन वे चाहते हैं कि स्लॉट बुकिंग जल्द हो, ताकि समय पर भुगतान मिल सके. छोटे और मझोले किसानों को प्राथमिकता देने की मांग भी सामने आ रही है, जिससे आर्थिक न्याय सुनिश्चित हो सके.
MP में MSP खरीदी की बड़ी तैयारी
मध्य प्रदेश में इस बार MSP पर गेहूं खरीदी के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी की है.खरीदी 10 अप्रैल 2026 से पहले चरण में इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में शुरू होगी, जबकि 15 अप्रैल से अन्य संभागों में प्रक्रिया शुरू होगी.
- 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य
- 19 लाख किसानों का पंजीयन
- 2585 रुपए प्रति क्विंटल MSP (बोनस सहित)
यह भी पढ़ें- चार सगे भाई-बहन बने पुलिस कांस्टेबल, आखिर किसान परिवार ने कैसे लिखी सफलता की चौंकाने वाली कहानी?
यह भी पढ़ें- IAS रिया सैनी कौन हैं? PM मोदी के क्षेत्र वाराणसी में मिली पहली पोस्टिंग, भाई ने NDTV से शेयर की पूरी कहानी