मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के निर्देशों की अनदेखी करने वाले नेताओं पर गाज गिरना शुरू हो गई है. पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह द्वारा पदभार ग्रहण के दौरान निकाली गई विशाल वाहन रैली पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने कड़ा रुख अपनाया है.
बीजेपी संगठन ने किसान मोर्चा के भिंड जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव को सैकड़ों गाड़ियों की रैली निकालने और अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटा दिया. कहा गया कि यह पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील के खिलाफ था. लेकिन सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि भोपाल में बीजेपी नेता सौभाग्य सिंह 700 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे. वहीं, शिवपुरी में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी भी 300 से ज्यादा वाहनों के साथ शक्ति प्रदर्शन करते नजर आए. लेकिन इन मामलों में अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई.
सौभाग्य सिंह पर बड़ी कार्रवाई
सौभाग्य सिंह को न केवल 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया है, बल्कि मामले के निराकरण तक उनके तमाम प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार निरस्त कर दिए गए हैं. अब वे निगम की बैठकों और निर्णयों में भाग नहीं ले सकेंगे. नोटिस में उल्लेख है कि लगभग 200 वाहनों के काफिले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाने' और 'फिजूलखर्ची रोकने' की अपील की सरेआम धज्जियां उड़ाईं.
भिंड में शक्ति प्रदर्शन का सिलसिला जारी
एक ओर जहां किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव को 100 गाड़ियों के काफिले के कारण पद से हटा दिया गया, वहीं अब पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार का मामला भी तूल पकड़ रहा है. बुधवार को लहार विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पाटीदार के साथ 10 गाड़ियों का काफिला और पुलिस सुरक्षा वाहन देखे गए. हद तो तब हो गई जब आलमपुर में स्वागत के दौरान दो जेसीबी (JCB) से फूलों की वर्षा की गई, जिसमें भारी मात्रा में डीजल की बर्बादी हुई.
संगठन के सामने साख की चुनौती
विपक्ष ने इस मुद्दे को लपकते हुए भाजपा को घेरा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या सज्जन सिंह यादव की तरह पवन पाटीदार पर भी कार्रवाई होगी? भाजपा संगठन और सरकार ने सौभाग्य सिंह पर कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन लगातार वायरल हो रहे वीडियो पार्टी की फजीहत करा रहे हैं.