MP Nutrition Scam: मध्य प्रदेश में बच्चों के पोषण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद राजनीति भी तेज हो गई है. धार जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए आने वाले पोषण आहार की अवैध भंडारण की खबर ने प्रशासन से लेकर नेताओं तक को कटघरे में खड़ा कर दिया है. मामले में भाजपा और कांग्रेस आमने‑सामने हैं और एक‑दूसरे पर आरोप‑प्रत्यारोप जारी हैं.
धार जिले में अवैध भंडारण का खुलासा
धार जिले के तिरला और आमखेड़ा क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए निर्धारित पोषण आहार का अवैध भंडारण पकड़ा गया है. महिला एवं बाल विकास विभाग और तिरला थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो अलग‑अलग स्थानों से बड़ी मात्रा में पोषण सामग्री जब्त की गई. यह कार्रवाई नियमित जांच के दौरान की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
आंगनवाड़ी के बच्चों के हिस्से का पोषण आहार
जांच में सामने आया कि जब्त किया गया पोषण आहार पोषण आहार केंद्र देलमी से प्रदाय किया गया था. यह सामग्री आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित और जरूरतमंद बच्चों को वितरित की जानी थी. आरोप है कि इस आहार की कालाबाजारी कर उसे अन्य उपयोग में लाया जा रहा था, जिससे बच्चों के पोषण अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता था.
सावित्री ठाकुर ने बताया मामला गंभीर
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री और धार की सांसद सावित्री ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों और कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए हैं. उनका साफ कहना है कि चाहे इसमें कोई भी व्यक्ति या माफिया शामिल हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई तय है.
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर आरोप
सावित्री ठाकुर ने इस दौरान कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पोषण आहार की कालाबाजारी कोई नई बात नहीं है और यह सिलसिला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के समय से चला आ रहा है. उनके मुताबिक अब जब मामला सामने आया है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा पलटवार
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. जिला कांग्रेस प्रवक्ता अजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश और केंद्र में लंबे समय से भाजपा की सरकार है, ऐसे में कालाबाजारी के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना गलत है. उन्होंने आरोप लगाया कि पोषण आहार और राशन की कालाबाजारी में शामिल लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की जाती.