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MP Nursing Scam: नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, योग्य कॉलेजों की परीक्षाओं को मिली हरी झंडी

मध्य प्रदेश नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच में सूटेबल पाए गए कॉलेजों को GNM प्रथम व तृतीय वर्ष की परीक्षा और परिणाम घोषित करने की अनुमति दे दी है.

MP Nursing Scam: नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, योग्य कॉलेजों की परीक्षाओं को मिली हरी झंडी

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की बहुचर्चित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीजन बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने सीबीआई जांच में 'सूटेबल' पाए गए नर्सिंग कॉलेजों की लंबित परीक्षाएं आयोजित करने और उनके परिणाम घोषित करने की अनुमति दे दी है.

सुनवाई के दौरान नर्सिंग काउंसिल ने हाईकोर्ट से नर्सिंग कॉलेजों की रुकी हुई परीक्षाएं कराने और परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति मांगी थी. वहीं, दूसरी ओर याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच में 'अनसूटेबल' पाए गए कॉलेजों की परीक्षाओं को लेकर कड़ी आपत्ति जताई.

दोनों पक्षों की दलीलें और विस्तृत बहस सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के GNM प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने की हरी झंडी दे दी है. इसके साथ ही, काउंसिल को शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लगभग 9,000 छात्रों के लिए GNM तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई है.

सिर्फ 245 कॉलेजों को मिली राहत

हाईकोर्ट ने यह राहत सीबीआई जांच के दायरे में आए कुल 695 नर्सिंग कॉलेजों में से केवल उन 156 कॉलेजों को दी है जो जांच में सही (सूटेबल) पाए गए थे. इसके अलावा, अपनी कमियां दूर कर 'सूटेबल' का दर्जा हासिल करने वाले 89 अन्य कॉलेजों को भी इसमें शामिल किया गया है. न्यायालय ने इन उपयुक्त और कमियां दूर करने वाले (कुल 245) कॉलेजों के लिए परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है.

अदालत ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि मानकों को पूरा न करने वाले शेष अन्य कॉलेजों की परीक्षाओं के आयोजन पर फिलहाल रोक बरकरार रहेगी. इस निर्णय से जहां एक ओर हजारों योग्य छात्रों को बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर न्यायालय का कड़ा रुख साफ दिखाई दे रहा है.

इस महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट आलोक वागरेचा और याचिकाकर्ता विशाल बघेल स्वयं उपस्थित रहे, जबकि शासन की ओर से उप-महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पैरवी की.

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