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MP High Court: रौब दिखाने के लिए सुरक्षा लेना दो BJP नेताओं को पड़ा भारी, अब चुकाने पड़ेंगे ढाई करोड़ रुपये

MP High Court Gwalior Bench Court: भाजपा नेता दिलीप शर्मा और सिंधिया समर्थक उनके भाई संजय शर्मा ने वर्ष 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की गुहार लगाई थी. याचिका में तर्क दिया गया कि कुछ वर्ष पूर्व हुए हमले में उनके परिवार के एक सदस्य की मौत भी हो गई थी. उनका परिवार असुरक्षित है और उसे खतरा है. इसलिए उनके परिवार को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराएं. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए सुरक्षा शुल्क लेकर सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया था. लेकिन दोनों में से किसी ने भी पुलिस विभाग को एक रुपए भी नहीं दिया.

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MP High Court: रौब दिखाने के लिए सुरक्षा लेना दो BJP नेताओं को पड़ा भारी, अब चुकाने पड़ेंगे ढाई करोड़ रुपये

Madhya Pradesh Highcourt: सरकारी गनर लेकर घूमना मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) ही नहीं, लगभग हर राज्य में नेताओं और रसूखदार लोगों का स्टेटस सिंबल बन चुका है. सरकारें भी अपनी पार्टी के नेताओं को बगैर पात्रता के सिर्फ उनका जलवा बरकरार रखने के लिए ही उन्हें गनर दे देती है, लेकिन अब ऐसा हो पाना आसान नहीं होगा. दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खण्डपीठ (Madhya Pradesh Highcourt Gwalior Bench)ने इसके खिलाफ न केवल कड़ी टिप्पणियां की, बल्कि भाजपा (BJP) से जुड़े दो नेताओं से गार्ड वापिस लेने और अब तक गार्ड की सेवाएं लेने के बदले 2 करोड़ 55 लाख रुपये जैसी भारी भरकम रकम बसूलने के भी आदेश दिए.

चम्बल का बंदूक प्रेम किसी से छिपा नहीं है. इस बीच ग्वालियर-चंबल और उसका बीहड़, जो कभी बागियों और बंदूकों के लिए मशहूर था. अब यहां लाल बत्ती में सुरक्षाकर्मियों के साथ घूमना स्टेटस सिंबल बन गया है. यह कमेंट किसी और संस्था अथवा सामान्य व्यक्ति ने नहीं की है, बल्कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने की है. हाईकोर्ट ने ग्वालियर के दो भाजपा नेता बंधुओं को दी गई सुरक्षा को वापस लेने के साथ ही अब तक लिए गए सुरक्षा के लिए दो करोड़ 55 लाख रुपये का जुर्माना ठोकते हुए यह टिप्पणी की.

कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए भाजपा नेता दिलीप शर्मा और उनके सिंधिया समर्थक संजय शर्मा को बड़ा झटका देते हुए 12 साल पुरानी याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने न केवल दोनों भाजपा नेता भाइयों को मिली सुरक्षा हटाने के आदेश दे दिए, बल्कि 2 करोड़ 55 लाख 64 हज़ार 176 रुपए की वसूलने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि ये ग्वालियर-चंबल का क्षेत्र है, जो कभी बागियों और बंदूकों के लिए मशहूर था. अब यहां पॉवर, पोजीशन और लाल बत्ती लगे वाहन में कंधे पर बंदूक टांगना सुरक्षाकर्मियों के साथ घूमना स्टेटस सिंबल माना जाता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा कभी भी मुफ्त में सुरक्षा प्रदान करने का आदेश नहीं दिया गया था.

गृह विभाग व डीजीपी को दिया समीक्ष करने का आदेश

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की डबल बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने अंतरिम आदेश में पुलिस रेगुलेशन को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने के लिए कहा था. एक बार फिर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन के DGP और गृह विभाग को भी इस बारे में नियमों की समीक्षा करने के आदेश दिए है. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में भाजपा नेताओं के बारे में कहा कि उनके परिवार में तीन लाइसेंसी हथियार हैं. यदि व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के चलते जान को खतरा है, तो निजी सुरक्षाकर्मी तैनात करें, जो पुलिसकर्मियों से ज्यादा सजग रहते हैं. साथ ही कोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव और DGP को निर्देश दिया है कि कि इस तरह के मामलों का पुनर्मूल्यांकन करें. कोर्ट ने कहा कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है. चार पुलिसकर्मियों को गर्ल्स कॉलेज के पास पदस्थ किया जाता, तो लड़कियों के साथ छेड़खानी को रोका जा सकता था.

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ये है पूरा मामला

 भाजपा नेता दिलीप शर्मा और सिंधिया समर्थक उनके भाई संजय शर्मा ने वर्ष 2012 में हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की गुहार लगाई थी. याचिका में तर्क दिया गया कि कुछ वर्ष पूर्व हुए हमले में उनके परिवार के एक सदस्य की मौत भी हो गई थी. उनका परिवार असुरक्षित है और उसे खतरा है. इसलिए उनके परिवार को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराएं. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए सुरक्षा शुल्क लेकर सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया था. 18 जनवरी 2012 से 28 जुलाई 2018 तक दोनों के निवास पर 1-4  गार्ड और दोनों के साथ दो-दो सुरक्षाकर्मी तैनात रहे, लेकिन कभी भी इन दोनों भाइयों ने पुलिस विभाग को सुरक्षा के बदले कोई राशि नहीं दी. इस दौरान कोर्ट रिव्यू के दौरान मामला संज्ञान में आने पर  कोर्ट ने एमपी हाईकोर्ट खंडपीठ ग्वालियर के एडिशनल एडवोकेट जनरल एमपीएस रघुवंशी ने इस संबंध में जवाब तलब किया. तो उन्होंने बताया कि अब इनके मामले खत्म हो चुके हैं. अब इन्हें सुरक्षा की जरूरत नहीं है. लिहाजा, दोनों भाइयों की सुरक्षा खत्म करने के साथ ही दोनों भाइयों की सुरक्षा पर अब तक खर्च हुए 2.55 करोड़ रुपए वसूलने का आदेश भी दिया. साथ ही उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस वालों को हटाकर जनता की सुरक्षा में लगाने को कहा है. 

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