मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े दल-बदल मामले में जबलपुर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को कोई भी विशेष निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विधिसम्मत तरीके से जारी है.
यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर की गई थी. याचिका में मांग की गई थी कि कांग्रेस से निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई कर उनकी सदस्यता समाप्त की जाए. मध्य प्रदेश कांग्रेस का आरोप था कि लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सप्रे ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रमों में मंच साझा किया था और पार्टी लाइन के विपरीत गतिविधियों में शामिल होकर भाजपा का समर्थन किया था. हालांकि, हाई कोर्ट ने माना कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं, इसलिए इस चरण में न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है.
300 करोड़ के बयान से चर्चा में
बिना से विधायक निर्मला सप्रे पिछले दिनों 300 करोड़ वाले बयान को लेकर चर्चा में रहीं. मीडिया से बातचीत में निर्मला सप्रे ने कहा कि अगर उमंग सिंघार 300 करोड़ रुपये दे दें तो वह उनके साथ चली जाएंगी. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि जो पार्टी बीना को जिला बनाएगी, वह उसका समर्थन करेंगी. इस बयान के सामने आते ही इसे राजनीतिक सौदेबाजी से जोड़कर देखा जाने लगा और विरोधी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं.
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