
Gujarat Factory Blast: मध्य प्रदेश के हरदा जिले में बीते साल पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट की आग अभी पूरी तरह से ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अब गुजरात के बनासकांठा में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में उसी तरह का हादसा हो गया. बनासकांठा की घटना ने देश के दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया. इसी से हरदा जिले का जख्म एक बार फिर से ताजा हो गया है. बनासकांठा की घटना में मरने या लापता होने वालों में बड़ी संख्या हरदा जिले के लोगों की है. ये लोग वो हैं, जो हरदा में हुए हादसे के बाद गुजरात के बनासकांठा में पटाखा फैक्ट्री में काम करने गए थे. ऐसे ही एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कैसे उसका पूरा परिवार इस हादसे की भेंट चढ़ गया और उसकी जान बची बची. अब मृतकों के परिजन ज्यादा मुआवजा दिए जाने की बात कर रहे हैं.
गुजरात के बनासकांठा जिले में मंगलवार को हुए पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट मामले में अब हादसे से जुड़े प्रत्यक्ष दर्शियों के बयान भी सामने आ रहे हैं . वहीं, मृतकों के इन परिजनों ने अब सरकार से मुआवजा राशि भी बढ़ाए जाने की मांग की है. फिलहाल गुजरात सरकार की तरफ से करीब 4.50 लाख रुपये मृतकों के परिजनों को मुआवजा राशि देने की घोषणा की गई है .
परिजनों ने 50 लाख का मांगा मुआवजा
वहीं, मृतक के परिजनों का कहना है कि उनके घर के घर ही तबाह हो गए और कुछ के पूरे घर ही उजड़ गए हैं. इसलिए हादसे में मृतकों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए. बता दें कि इस हादसे में मध्य प्रदेश के हरदा जिले के हंडिया और देवास जिले के संबलपुर से वहां काम करने गए करीब 28 मजदूरों में से करीब 20 मजदूरों की मौत होने की बात सामने आ रही है. साथ ही इनमें से एक महिला मजदूर गंभीर रूप से घायल भी है.
हरदा फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद आए थे गुजरात
गुजरात पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे में मृतकों में से एक के परिजन राजेश पिता ने बताया कि वे हरदा जिले के हंडिया क्षेत्र के रहने वाले हैं. हंडिया से रविवार को ही कुल 24 लोग पटाखा फैक्ट्री में काम करने आए थे. इसके पहले वे हरदा में ही रहकर वहां की राजेश अग्रवाल की पटाखा फैक्ट्री में ठेकेदार के जरिए काम करते थे, लेकिन जब हरदा की पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ तो फैक्ट्री बंद हो गई. इसके बाद वे गुजरात की पटाखा फैक्ट्री में काम करने लगे. यहां उन्हें लक्ष्य नाम की एक महिला ठेकेदार काम कराने लाई थी, लेकिन यहां हुए हादसे में उनके छोटे भाई विष्णु पिता सत्यनारायण नायक की मौत हो गई.
ब्लास्ट में कई परिचितों की हुई मौत
इसके साथ ही हादसे के प्रत्यक्षदर्शी राजेश ने बताया कि उनकी बुआ गुड्डी बाई सहित बुआ के तीनों बच्चों की भी इस हादसे में मौत हो गई है. ये सब भी हंडिया के ही रहने वाले थे. वहीं, हंडिया की ही निवासी उनकी परिचित एक महिला बबीता पति संतोष अभी घायल हैं, लेकिन बबीता के दोनों बच्चे धनराज और संजय की इस हादसे में मौत हो गई है. इनके साथ ही राजेश ने बताया कि उनकी एक छोटी बुआ डाली पति राकेश थीं. वह यहां काम करने आई थीं, लेकिन वो और उनके पति उनकी छह साल की बच्ची की भी इस हादसे में मौत हो गई.
ये भी पढ़ें- Gujarat Firecracker Factory Blast : अब 20 हुई मृतकों की संख्या, मजदूरों की शिनाख्त करने एमपी से गुजरात पहुंची टीम
50 लाख रुपये दिया जाए मुआवजा
हालांकि, जब राजेश से पूछा गया कि क्या सरकार से उन्हें किसी तरह का आर्थिक सहायता का आश्वासन मिला है तो उन्होंने ऐसी किसी भी आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी से इनकार किया. हालांकि जब उनको बताया गया कि 4.50 लाख रुपये प्रत्येक मृतक के परिजन को देने की घोषणा की गई है. जिस पर राजेश ने असंतोष जताते हुए कम से कम एक मृतक को 50 लाख रुपये परिजनों को मिलना चाहिए.
छह लोगों का परिवार तबाह
उनका कहना था कि एक परिवार के तो छह के छह लोग ही खत्म हो गए हैं. उस घर में तो पूरा ताला ही लग गया. वहां अब कोई नहीं बचा है. वह लोग देवास जिले के संदलपुर के रहने वाले थे. इनमें एक लड़के का नाम लखन पिता गंगाराम था और इसी तरह उनका खुद का भी पूरा परिवार इस हादसे में खत्म हो गया है. जिसमें उनके चाचा, बुआ, फूफा, भाई सभी की मौत हो गई. इसलिए मुआवजा के रूप में काम से कम 50 लाख रुपये दिए जाने चाहिए.
ये भी पढ़ें- गुजरात की पटाखा फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट, एमपी के 18 मजदूरों की मौत, सीएम ने जताया गहरा दुख
बेटी बची, मा की गई जान
गुजरात हादसे में एक घायल बच्ची के पास बैठ 15 साल के नाबालिग ने बताया कि वे हरदा जिले के हंडिया के रहने वाले हैं. हादसे के समय वे लोग फैक्ट्री के अंदर ही थे. जैसे ही ब्लास्ट हुआ सब लोग बाहर की तरफ भागे, जिसमे वह भी शामिल थे. फिलहाल वो अस्पताल में अपनी बुआ की तीन साल की बेटी की देखरेख कर रहे हैं. इसके सिर में चोट लगी है.
हादसे के दौरान उनकी बुआ डाली पति राकेश की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि यहां से पहले वह हरदा के पटाखा फैक्ट्री में ही काम करते थे. वहां भी ब्लास्ट हुआ था तो फैक्ट्री बंद हो गई. इसके बाद में गुजरात आ गए थे.