नाबालिग बच्चियों के साथ अश्लील हरकत करने वाले एक शिक्षक की बर्खास्तगी के राज्य शासन के आदेश को हाईकोर्ट ने सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है. आरोपी शिक्षक को कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है. पौने तीन साल जेल में रहने के बाद फिलहाल वह जमानत पर बाहर है.
दरअसल, ग्वालियर के नौकरी से निकाले गए शिक्षक मुंशीलाल माहौर ने हाईकोर्ट में अपनी बर्खास्तगी के आदेश को लेकर याचिका दायर की थी. उन्होंने दलील दी कि 22 अक्टूबर 2022 को उनके खिलाफ प्राथमिक विद्यालय मुरार ब्लॉक में पढ़ने वाली 7-8 साल की बच्चियों ने अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया था, जिसके चलते उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई और अगले ही दिन उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. जबकि नियमानुसार बड़ी सजा देने से पहले विभागीय जांच की जानी चाहिए थी.
24 अक्टूबर 2022 को गिरफ्तार किया था
वहीं, शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आरोपी मुंशीलाल माहौर को 24 अक्टूबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था. 8 अप्रैल 2024 को उसे 20 साल की सजा सुनाई गई थी. 7 जुलाई 2025 को उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया. ऐसे में आरोपी के कृत्य को देखते हुए उसे सेवा में वापस नहीं लिया जाना चाहिए.
सबसे अधिक प्रभाव शिक्षक का होता
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुंशीलाल माहौर की याचिका खारिज करते हुए कहा कि माता-पिता के बाद बच्चे पर सबसे अधिक प्रभाव उसके शिक्षक का होता है. उनके भविष्य को संवारने में शिक्षक की बड़ी भूमिका होती है. शिक्षक को अपने आचरण में नैतिक होना चाहिए. याचिकाकर्ता को एक गंभीर अपराध में दोषी ठहराया गया है. पीड़ित नाबालिग बच्चे ने केस के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ स्पष्ट आरोप लगाए हैं. ऐसे में भले ही नियमों की अनदेखी कर याचिकाकर्ता को बर्खास्त किया गया हो, लेकिन ऐसी परिस्थिति में कोर्ट के पास दंड आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई उचित कारण नहीं है.
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