
Madhya Pradesh Assembly Elections : मध्य प्रदेश में (Madhya Pradesh) 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने वाले हैं. इसी के साथ चुनावी पार्टियों (Political Parties) में बगावत के सुर भी तेज़ हो गए हैं. कांगेस (Congress) की सूची जारी होने के बाद ग्वालियर (Gwalior) में भी विद्रोह नज़र आ रहा है. ग्वालियर सीट (Gwalior Assembly) से पार्टी ने उप चुनाव में हारे सुनील शर्मा (Sunil Sharma) को एक बार फिर प्रत्याशी (Candidate) बनाया है. एक तरफ जहां शर्मा ने अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ इस सीट से दावेदारी पेश कर रहे चार नेताओं ने शुक्रवार को एकसाथ बैठक की. इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) को 24 घंटे में प्रत्याशी बदलने का अल्टीमेटम दिया गया है. इससे कांग्रेस पार्टी की दिक्कतें बढ़ गईं हैं.
बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस ने क्षत्रीय उतारा
साल 2018 में ग्वालियर विधानसभा सीट से कांग्रेस जीती थी. तब यहां से कांग्रेस प्रत्याशी प्रधुम्न सिंह तोमर थे. उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता और तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया को तगड़ी शिकस्त दी थी. तोमर कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने. लेकिन 2020 में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत कर भाजपा जॉइन की तो उनके साथ विधायक पद छोड़कर कमलनाथ सरकार गिराने वालों में तोमर भी थे. बाद में हुए उप चुनाव में तोमर इसी सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे. कांग्रेस ने यहां से एक नए चेहरे सुनील शर्मा को मैदान में उतारा. हालांकि वे भारी अंतर से चुनाव हार गए लेकिन उन्होंने तब से लगातार जन संघर्ष जारी रखा और नगर निगम चुनावों में इसका नतीजा भी देखने को मिला. जब वे अपने सबसे ज़्यादा पार्षदों को जिताने में कामयाब रहे.
पहले सिंधिया के समर्थक रहे हैं सुनील शर्मा
बीजेपी ने भी यहां से एक बार फिर क्षत्रीय समाज से आने वाले ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को ही मैदान में उतारा है. ऐसे में कांग्रेस ने भी जातीय गणित साधते हुए ब्राह्मण समाज से आने वाले सुनील शर्मा को ही फिर से टिकट देने की घोषणा कर दी. कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शर्मा कांग्रेस में मूलतः कांग्रेस के समर्थक थे लेकिन जब सिंधिया ने कांग्रेस की सरकार गिराकर बीजेपी में जाना तय किया तो सुनील शर्मा ने उनके साथ जाने की बजाय कांग्रेस में ही रहने का फैसला किया. कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश महामंत्री और उप चुनाव में प्रत्याशी भी बनाया. हालांकि वह हार गए. अब एक बार फिर कांग्रेस ने उन्हीं पर भरोसा जताया है.
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कांग्रेस पार्टी के दावेदार हुए नाराज
इस सीट से चार प्रमुख और दावेदार भी थे. खास बात ये है कि ये सभी क्षत्रिय समुदाय से ही थे. यह सभी तोमर उप वर्ग से जुड़े थे. इस सीट पर क्षत्रिय मतों की संख्या काफी ज़्यादा है. कल तक एक दूसरे के खिलाफ टिकट मांगने वाले चारो तोमर प्रत्याशी आज एकजुट होकर सुनील शर्मा को टिकट देने का विरोध करते हुए दिखे. शुक्रवार को राजेन्द्र सिंह तोमर, योगेंद्र सिंह तोमर, सौरभ सिंह तोमर, अशोक सिंह तोमर और वीरेंद्र सिंह तोमर ने एक साथ बैठक कर मीडिया से भी बात की. उनका दावा है कि उन्होंने कमलनाथ को अल्टीमेटम दिया है. ग्वालियर सीट पर तत्काल टिकट बदला जाए अन्यथा वे लोग काम नही करेंगे.
नाराज़गी की वजह भी आई सामने
चारो दावेदारों ने बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शर्मा कांग्रेस छोड़ने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के सिपहसालार हैं और अभी भी उनकी निष्ठा या वफ़ादारी संदिग्ध है. उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया है जिसने बीजेपी प्रत्याशी से मिलकर 2020 में उपचुनाव में 34000 वोटो से हार कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया था. अब एक बार फिर उनको ही टिकट दिया गया है. यह गलत है और हम सब इसका विरोध करते है. हमारीं मांग है चौबीस घंटे के अंतर हाईकमान अपने फैसले पर पुनर्विचार करे. साथ ही सुनील शर्मा की जगह जीत सकने वाले पार्टी के निष्ठावान व्यक्ति को टिकट दिया जाए और अगर ऐसा नही हुआ तो हम लोग पार्टी का काम नहीं करेंगे.
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