Jabalpur Exhibition Center NDTV Ground Report: जबलपुर के मनमोहन नगर में बनाया गया एग्जीबिशन सेंटर, जो स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच देने का सपना लेकर तैयार किया गया था, आज बदहाली का प्रतीक बन चुका है. वर्ष 2017 में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना लगभग नौ साल बाद भी शुरू नहीं हो पाई है. रखरखाव की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह आधुनिक परिसर अब खंडहर में तब्दील होने लगा है. जिस केंद्र से रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास की उम्मीद थी, वहां आज गंदगी, अव्यवस्था और अस्थायी अतिक्रमण का नजारा दिखता है. इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हुई है, बल्कि स्थानीय उद्योगों की उम्मीदों को भी गहरा झटका लगा है.
महत्वाकांक्षी योजना बनी उपेक्षा की शिकार
मनमोहन नगर स्थित एग्जीबिशन सेंटर का निर्माण उद्योग विभाग ने वर्ष 2017 में किया था. इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया गया था. इसका उद्देश्य जबलपुर और आसपास के उद्योगों को एक ऐसा मंच देना था, जहां वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ सकें. लेकिन नौ साल बीत जाने के बावजूद इस सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो सका.

Jabalpur Exhibition Center NDTV Ground Report: एग्जिबिशन सेंटर
12 एकड़ में फैला परिसर, अब खंडहर जैसी हालत
करीब 12 एकड़ में फैला यह विशाल परिसर अब रखरखाव के अभाव में जर्जर होता जा रहा है. चारों ओर उगी जंगली घास, टूटी-फूटी संरचनाएं और गंदगी इसकी खराब स्थिति को बयां करती हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बना यह ढांचा धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है.
अस्थायी आश्रय और गोदाम में तब्दील हुआ परिसर
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि परिसर के कई हिस्सों में मजदूर परिवारों ने अस्थायी डेरा डाल लिया है. वहीं, आसपास चल रहे सड़क निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनियों ने इस जगह को गोदाम की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. इससे यह साफ होता है कि परियोजना के मूल उद्देश्य से यह पूरी तरह भटक चुकी है.

Jabalpur Exhibition Center NDTV Ground Report: गोदाम बना दिया
उद्योगों को मंच देने का था सपना
इस एग्जीबिशन सेंटर को खासतौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए तैयार किया गया था. यहां व्यापारिक मेले, उद्योग प्रदर्शनियां, निवेश सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना थी. इससे जबलपुर को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था.
कई सेक्टर को मिलना था बड़ा लाभ
यदि यह परियोजना समय पर शुरू हो जाती, तो गारमेंट, फर्नीचर, रक्षा उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिलता. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकते थे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती.

Jabalpur Exhibition Center NDTV Ground Report: 'चूल्हा' जलता हुआ
अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बनाने की थी योजना
परियोजना के तहत इस सेंटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन और प्रदर्शनी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना थी. इसमें आधुनिक पार्किंग व्यवस्था, ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल की गई थीं. लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से ये सभी सुविधाएं बेकार साबित हो रही हैं.
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठते सवाल
नौ साल तक परियोजना के शुरू न होने से प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय उद्योग जगत और व्यापारियों का कहना है कि यदि इस सेंटर को समय पर चालू किया जाता, तो जबलपुर औद्योगिक नक्शे पर तेजी से उभर सकता था. अब यह परियोजना सरकारी लापरवाही और संसाधनों की बर्बादी का उदाहरण बन गई है, जिससे विकास की संभावनाओं को झटका लगा है.
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