मध्यप्रदेश के इंदौर की दूषित पेयजल त्रासदी की पृष्ठभूमि में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक विवादास्पद टिप्पणी और कांग्रेस के आरोपों का एक सरकारी आदेश में कथित रूप से जिक्र करने की गंभीर चूक पर देवास जिले के एक अनुविभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) को रविवार को निलंबित कर दिया गया.
अधिकारियों के अनुसार, उज्जैन संभाग के आयुक्त (राजस्व) आशीष सिंह ने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता और अनियमितता के आरोपों में देवास के SDM को निलंबित करने के आदेश जारी किए.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि SDM द्वारा जारी आदेश में कांग्रेस के उस ज्ञापन के एक हिस्से की हू-ब-हू नकल कर दी गई थी, जो प्रमुख विपक्षी दल ने विरोध प्रदर्शन की पूर्व सूचना के लिए प्रशासन को सौंपा था. इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया.
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कांग्रेस के ज्ञापन में इंदौर की दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधा गया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार के सवाल के जवाब में अशोभनीय शब्द ‘घंटा' का इस्तेमाल किया, जो ‘अमानवीयता और निरंकुशता' का प्रतीक है.
ज्ञापन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया था कि इस कथित अमानवीय व्यवहार के विरोध में भाजपा के सांसदों और विधायकों के निवास के सामने ‘घंटा' बजाकर प्रदर्शन किया जाएगा.
यह विरोध प्रदर्शन इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल पीने से लोगों की मौत और इस त्रासदी पर पूछे गए सवाल के जवाब में विजयवर्गीय की टिप्पणी के विरोध में आयोजित किया गया था.
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गौरतलब है कि 31 दिसंबर की रात इंदौर में दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सवाल पूछे जाने पर कैलाश विजयवर्गीय ने कैमरे के सामने ‘घंटा' शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद यह विवाद गहरा गया.
प्रशासन ने दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि की है. वहीं, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो जनवरी को कहा था कि उन्हें इस घटना में 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है. स्थानीय लोगों का दावा है कि दूषित जल पीने से छह माह के बच्चे सहित कुल 16 लोगों की मौत हो चुकी है.
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