इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से बिगड़े हालात को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है. कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया पूरे क्षेत्र में पानी की टेस्टिंग, बोरवेल की सफाई और सर्वे का काम जारी हैं. उन्होंने बताया कि दूषित पानी पीने से बीमार हुए 203 लोगों का उपचार चल रहा है, बीमारी की आशंका पर लोगों को भर्ती भी किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि अब तक कुल 13 हजार 444 घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है. चौबीस घंटे डॉक्टरों को ड्यूटी तय की गई. रेफेरल के लिए 10 एम्बुलेंस तैनात है, अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार के लिए बेड्स चिन्हांकित किए गए हैं. शिकायत के निवारण के 24X7 कॉल सेंटर सक्रिय है. सहायता डेस्क भी स्थापित की गई है.
कलेक्टर ने की छह मौत की पुष्टि
दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर कलेक्टर वर्मा ने कहा कि डॉक्टर की टीम जो बताते हैं उसे लिया जा रहा है. आधिकारिक तौर पर 6 की मौत की पुष्टि हुई हैं. उन्होंने बताया कि इलाके में रिंग सर्वें भी किया जा रहा हैं. जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर का पैनल बनाया गया है.
सभी जल स्रोतों के पानी की जांच करने के निर्देश
इधर, इंदौर की घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को बड़ी बैठक की. जिसमें 16 नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों मौजूद रहे. बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के तमाम जल स्रोतों के पानी की जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए. सभी जल स्रोतों के पानी के नमूने की जांच की जाए, लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध कराएं. टंकियों की साफ-सफाई, जलप्रदाय के लिए SOP भी जारी किया जाए, 20 वर्ष पुरानी पाइप लाइन का चिन्हांकन करें और उनकी जांच करें. उन्होंने कलेक्टरों को जिला स्तर पर निगरानी कमेटी बनाकर पूरी व्यवस्था देखने के निर्देश दिए.
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