Indore Elevated Corridor: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में यातायात की समस्या को बहुत हद तक खत्म करने के लिए बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेश किया जा रहा है. इसी कड़ी में ए.बी रोड से नवलखा तक बनने वाले 7.40 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का काम अब जमीन पर नजर आने लगा है. यह प्रोजेक्ट पिछले कई सालों से फाइलों और मंजूरी के फेर में अटका हुआ था, लेकिन अब इसे हरी झंडी मिल चुकी है. निर्माण एजेंसी ने शुरुआती तौर पर मिट्टी का परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) शुरू कर दिया है, ताकि पिलर्स की गहराई और मजबूती तय की जा सके. 15 फरवरी से निर्माण स्थल पर भारी मशीनें पहुंच जाएंगी और नींव भरने के साथ ही पिलर खड़े करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

इंदौर में प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर का डिजाइन कुछ इस तरीके से होगा. इसमें बसों के लिए दो अलग लेन होंगे.
350 करोड़ है प्रोजक्ट की लागत
इस मेगा प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 350 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शहर के सबसे घनी आबादी वाले और ट्रैफिक के दबाव वाले क्षेत्रों को सीधे जोड़ेगा, जिससे वाहन चालकों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी. हाल ही में हुई शहर विकास बैठक में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी और व्यावहारिक समीक्षा की थी. बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अब इसके डिजाइन में किसी भी तरह का फेरबदल नहीं किया जाएगा, ताकि काम में कोई और देरी न हो.
30-40 मिनट की दूरी 10-12 मिनट में तय
यह कॉरिडोर इंदौर के शहरी विकास के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है. 15 फरवरी से एलआईजी चौराहे से नवलखा के बीच खुदाई का काम शुरू होगा, जिसके लिए रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्रबंधन की योजना पर भी प्रशासन काम कर रहा है. 7.40 किलोमीटर की यह दूरी तय करने में अभी पीक ऑवर्स के दौरान लोगों को 30 से 40 मिनट का समय लगता है, जो कॉरिडोर बनने के बाद घटकर महज 10 से 12 मिनट रह जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर इस प्रोजेक्ट को पूरा कर इंदौर की जनता को समर्पित किया जाए.
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