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This Article is From Apr 04, 2026

कौन हैं IAS कलेक्टर विकास मिश्रा? जमीन पर बैठकर सुनी फरियाद, शिकायत पर हाथों-हाथ लिया एक्शन

IAS Vikas Mishra Sidhi Collector: सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा का जमीनी अंदाज चर्चा में है. गांव पहुंचकर जमीन पर बैठकर समस्याएं सुन रहे हैं और मिड-डे मील में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं. 

कौन हैं IAS कलेक्टर विकास मिश्रा? जमीन पर बैठकर सुनी फरियाद, शिकायत पर हाथों-हाथ लिया एक्शन

IAS Vikas Mishra Sidhi Collector: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कलेक्टर आईएएस विकास मिश्रा एक बार फिर अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं. कभी फरियादी महिला के हाथ पर अपना मोबाइल नंबर लिखने वाले मिश्रा अब गांवों में जमीन पर बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते नजर आ रहे हैं.

हाल ही में जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही वे लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और सीधे लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं. साथ ही मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश भी दे रहे हैं.

स्वास्थ्य शिविर में अचानक पहुंचे कलेक्टर

शनिवार को मझौली विकासखंड के बोदारी टोला में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कलेक्टर विकास मिश्रा अचानक पहुंच गए. यहां उन्होंने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं.

ग्रामीणों ने केवाईसी सहित कई समस्याएं बताईं, जिस पर कलेक्टर ने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई. उन्होंने नाराजगी जताते हुए पूछा कि अब तक काम क्यों नहीं हुआ. उनके तेवर देखकर मौके पर कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया.

एक हफ्ते में बदली प्रशासनिक रफ्तार

पिछले एक सप्ताह में सीधी जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. जो अमला पहले वर्किंग डे में भी सक्रिय नहीं था, अब छुट्टियों में भी काम करता नजर आ रहा है. इसकी बड़ी वजह खुद कलेक्टर विकास मिश्रा हैं, जो लगातार फील्ड में रहकर निरीक्षण कर रहे हैं और अधिकारियों को जवाबदेह बना रहे हैं. स्वास्थ्य शिविर के दौरान कलेक्टर ने स्कूली बच्चों से मिड-डे मील को लेकर सवाल किया. बच्चों ने बताया कि उन्हें सिर्फ चावल और दाल ही मिलती है, रोटी और सब्जी नहीं. इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और कहा कि अब बच्चों को पूरा भोजन मिलेगा. इस मामले से साफ संकेत मिला है कि जिले में मिड-डे मील योजना में गड़बड़ी हो रही है और समूहों की मनमानी सामने आई है.

आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष फोकस

कलेक्टर विकास मिश्रा का खास फोकस मझौली और कुसमी जैसे आदिवासी क्षेत्रों पर है. यहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं, जो अभी भी कई सरकारी योजनाओं से वंचित हैं. कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभ दिलाया जाए. लगातार निरीक्षण और मॉनिटरिंग के चलते प्रशासनिक अमले में सक्रियता बढ़ी है.

सीधी में नए कलेक्टर के आते ही प्रशासनिक व्यवस्था में तेजी देखने को मिल रही है. जमीनी स्तर पर जाकर समस्याएं सुनना और तुरंत कार्रवाई करना उनकी कार्यशैली को अलग बनाता है. आने वाले दिनों में इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर साफ नजर आ सकता है.

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