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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में IAS, IPS और IFS अफसरों का है टोटा ! कितने और क्यों खाली हैं पद?

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी अब एक गंभीर समस्या बनती दिख रही है. बीते दिनों राज्यसभा में केन्द्र सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में इससे संबंधित आंकड़े सामने आए. जिसके मुताबिक 1 जनवरी 2024 तक मध्य प्रदेश में 66 आईएएस, 40 आईपीएस और 81 आईएफएस अधिकारियों की कमी है

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में IAS, IPS और IFS अफसरों का है टोटा ! कितने और क्यों खाली हैं पद?

Shortage of IAS, IPS and IFS officers: मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अधिकारियों की कमी अब एक गंभीर समस्या बनती दिख रही है. बीते दिनों राज्यसभा में केन्द्र सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में इससे संबंधित आंकड़े सामने आए. जिसके मुताबिक  1 जनवरी 2024 तक मध्य प्रदेश में 66 आईएएस, 40 आईपीएस और 81 आईएफएस अधिकारियों की कमी है. इसी तरह छत्तीसगढ़ में IAS के 41 और IFS के 45 पद रिक्त हैं. इस कमी का आंकलन राज्य में स्वीकृत पदों और उन पर कार्यरत सिविल सर्वेंट्स की संख्या में अंतर से किया गया है.  

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कहां कितने पद हैं रिक्त?

राज्यसभा में पेश रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में IAS के 459 स्वीकृत पद हैं, इनमें 66 खाली हैं. IPS के 319 पद हैं, इनमें 48 खाली हैं. आईएफएस के 296 स्वीकृत पद हैं, इनमें 81 खाली हैं.मध्यप्रदेश में कार्यरत IAS अधिकारियों की संख्या फिलहाल 393 है. इसी तरह से कार्यरत IPS की संख्या 271 और IFS की संख्या 215 है. इन तीनों की सेवाओं में सबसे ज्यादा अधिकारियों की कमी IFS में है. इसके बाद IAS और फिर IPS का नंबर आता है.   
इसी तरह से छत्तीसगढ़ में भी अफसरों के कई पद रिक्त हैं. छत्तीसगढ़ विधानसभा में 16 दिसंबर को पेश एक आंकड़े के मुताबिक राज्य में आईएएस के कुल 202 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 161 ही भरे हैं, 41 पद रिक्त हैं. बीजेपी विधायक धरमलाल कौशिक के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर से बताया गया कि राज्य में आईएफएस के कुल 153 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 108 ही भरे हैं, 45 रिक्त हैं.

कहां अटकी है नियुक्तियां?

केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने राज्यसभा में बताया कि पदोन्नति कोटे के रिक्त पदों को भरने में देरी राज्य सरकार द्वारा आवश्यक प्रस्ताव न भेजने के कारण है. इसके कारण UPSC द्वारा चयन समिति की बैठकें नहीं हो पा रही हैं या फिर योग्य राज्य सिविल सेवा अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं.यह स्थिति प्रशासनिक क्षमता को और कमजोर करती है. दरअसल इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है. हालांकि, राज्य सरकार अपनी जरूरत के अनुसार पदों की संख्या की मांग कर सकती है. इस मामले में आखिरी फैसला केन्द्र सरकार का होता है. जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश में प्रत्यक्ष भर्ती के पदों पर पदोन्नति के पदों की तुलना में कमी ज्यादा है. विस्तार से इस समझें तो राज्य में IAS के 66 खाली पदों में से 56 सीधी भर्ती के और 10 पदोन्नति के हैं. इसके अलावा IPS के 23 रिक्त सीधी भर्ती के और 5 प्रमोशन वाले हैं. इसी तरह से IFS में 56 पद सीधी भर्ती के और 25 प्रमोशन के खाली हैं. 

अधिकारियों कमी की वजहें क्या?

जानकारों का कहना है कि दोनों ही राज्यों में अधिकारियों की कमी की दो प्रमुख वजहें हैं. एक तो दोनों ही राज्यों में स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत अधिकारियों की संख्या कम है. इसके अलावा कई अधिकारी केन्द्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाते हैं. अकेले मध्यप्रदेश में ही 40 IAS अधिकारी केन्द्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं. अधिकारियों की कमी का असर सीधे जनता पर पड़ रहा है. सरकारी योजनाओं को अमल में लाने पर परेशानी होती है. इसके साथ कानून व्यवस्था का भी मामला खड़ा होता है. फिलहाल दोनों ही राज्यों में कई अधिकारी ऐसे हैं जिनके पास दूसरे विभागों का भी प्रभार है. इसकी वजह से काम प्रभावित होता है. इन सबसे इतर कई अधिकारियों के प्रमोशन भी नहीं हो रहे हैं जिसका असर भी पड़ रहा है. 
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