Gwalior Wall Painting: मध्य प्रदेश के ग्वालियर की दीवारें सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि सोच से बदरंग हुई थीं. ग्वालियर स्मार्ट सिटी की चमक-दमक के बीच कुछ लोगों की घटिया मानसिकता ने यह दिखा दिया कि शहर आधुनिक जरूर हो सकता है, लेकिन सोच अब भी पिछड़ी हुई है.
दरअसल, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत योग करती महिलाओं की कलात्मक पेंटिंग्स ग्वालियर की सड़कों पर बनाई गई थीं. इन पेंटिंग्स का मकसद फिटनेस, अनुशासन और महिला सशक्तिकरण को दर्शाना था. मगर कुछ अराजक तत्वों ने इन्हीं चित्रों को अपनी बीमार सोच का शिकार बना लिया. महिलाओं की आकृतियों पर अशोभनीय निशान और खरोंचें बना दी गईं.
11वीं कक्षा की एक छात्रा आशी कुशवाह ने उठाई आवाज
ग्वालियर को शर्मसार कर देने वाला यह मामला तब सामने आया, जब 11वीं कक्षा की एक छात्रा आशी कुशवाह ने इसे अनदेखा करने की बजाय गंभीरता से लिया. रोजाना उसी रास्ते से गुजरते हुए उन्होंने तय किया कि चुप रहना भी अपराध जैसा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर न सिर्फ पेंटिंग्स की हालत दिखाई, बल्कि समाज से एक तीखा सवाल भी पूछा-अगर एक चित्र भी सुरक्षित नहीं है, तो असल महिलाएं कितनी सुरक्षित होंगी?

Gwalior Wall Painting: योग करती महिलाओं की पेंटिंग्स पर हमला: ग्वालियर में मचा बवाल, बड़ा कदम उठाएगा Gen Z
कॉलेज छात्र लोकेंद्र सिंह ने भी दिया साथ
वीडियो वायरल होते ही बहस की लहर दौड़ गई. किसी ने छात्रा की हिम्मत की सराहना की, तो किसी ने शहर की छवि खराब करने का आरोप लगाया. लेकिन सवाल यही रहा कि छवि खराब वीडियो से हुई या हरकत से? इस बीच एक कॉलेज छात्र लोकेंद्र सिंह सामने आए. उन्होंने बिना किसी प्रशासनिक आदेश का इंतजार किए, खुद पेंट और ब्रश उठाया और बिगाड़े गए हिस्सों को ठीक किया. उनका कहना था कि यह सिर्फ दीवार की बात नहीं, बल्कि यह संदेश देने की जरूरत है कि हर पुरुष ऐसी सोच नहीं रखता.
11 जनवरी को Gen Z से बनवाएंगे पेंटिंग्स
सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार ग्वालियर नगर निगम को भी कदम उठाना पड़ा. निगम की टीम ने सभी आपत्तिजनक पेंटिंग्स को सफेद रंग से ढंक दिया. अब प्रशासन इन दीवारों पर नई कलाकृतियां बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें युवाओं को शामिल किया जाएगा. अब इन दीवारों पर नए सिरे से कलाकृतियां बनाने की योजना है. अब इन दीवारों पर 11 जनवरी को Gen Z को बुलाकर पेंटिंग्स बनवाई जाएंगी. इसके बाद उनका सम्मान भी किया जाएगा.
ये भी पढ़ें- खुर्जा से ग्वालियर मेले तक: 100 साल पुरानी खजला मिठाई की वो कहानी, जो आज भी लोगों का दिल जीत रही