Gwalior Street Dogs Committee: ग्वालियर में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या और काटने की घटनाओं ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है. सड़कों पर बेधड़क घूम रहे कुत्तों से सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता तीनों पर असर पड़ रहा है. इसी समस्या के समाधान के लिए कलेक्टर रूचिका चौहान की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की गई है. यह कमेटी नसबंदी, टीकाकरण, आश्रय, डेटा तैयार करने और विभागों के समन्वय के जरिए सुव्यवस्थित कार्रवाई करेगी.
शीर्ष स्तर से वार्ड तक समन्वय
कमेटी की अध्यक्ष कलेक्टर होंगी. सदस्य के रूप में जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत), आयुक्त नगर निगम, संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, उप संचालक कृषि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला खेल अधिकारी, कॉलेज प्राचार्य और एडब्ल्यूबीआई के जिला प्रतिनिधि शामिल रहेंगे.
अनुविभागीय स्तर पर एसडीओ (राजस्व) अध्यक्ष होंगे, साथ में एसडीओ (पुलिस), तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ, नगरीय निकाय अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, नामित समाजसेवी व दानदाता रहेंगे. ग्राम पंचायत स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारी, पंचायत सचिव, कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी, स्वास्थ्य विभाग के नामित अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सरपंच और पशु कल्याण संस्थाएं जुड़ी रहेंगी. नगरीय निकाय स्तर पर भी पशु चिकित्सा, पुलिस, स्वास्थ्य और प्रशासनिक विभागों के नामित अधिकारी समन्वय करेंगे.
पकड़, नसबंदी, टीकाकरण और आश्रय
आवारा श्वानों को सड़कों से सुरक्षित तरीके से पकड़कर एबीसी (Animal Birth Control) सेंटर तक ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की जाएगी. पकड़ने के बाद उनकी नसबंदी, टीकाकरण, भोजन और देखभाल की ज़िम्मेदारी संबंधित विभागों और समाजसेवी संगठनों के साथ मिलकर निभाई जाएगी. शहर में घूमने वाले कुत्तों के लिए आश्रय स्थल भी बनाए जाएंगे, जहां उनके रहने-खाने की समुचित व्यवस्था होगी, ताकि सड़कों पर उनकी संख्या और आक्रामक घटनाओं में कमी आए.
डेटा और नक्शा-आधारित काम
कमेटी आवारा व पालतू श्वानों का समग्र डेटा तैयार करेगी. जिन इलाकों में कुत्तों की संख्या ज़्यादा है या काटने की घटनाएँ अधिक होती हैं, उन हॉटस्पॉट्स को विशेष रूप से चिन्हित किया जाएगा. सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग निगरानी दल और अन्य स्रोतों के जरिए डेटा एकत्र करेगा. वन क्षेत्र में आवारा श्वानों की आवाजाही और वन्यजीवों पर संभावित असर को देखते हुए वन विभाग निगरानी और नियंत्रण की अलग व्यवस्था करेगा.
जन-जागरूकता और स्वास्थ्य सुरक्षा
किसानों और श्वान पालकों को सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के अनियंत्रित विचरण से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि कुत्ते के काटने पर पीड़ित को तत्काल चिकित्सा मिले और शासकीय चिकित्सालयों में एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन सहित जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे. इससे गंभीर मामलों का जोखिम घटेगा और उपचार में देरी नहीं होगी.
कानूनी अनुपालन और विभागीय तालमेल
यह कमेटी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में बनाई गई है. सभी विभाग नगर निगम, पुलिस, पशु चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत और आईटी आपसी तालमेल से काम करेंगे, ताकि पकड़, नसबंदी, टीकाकरण, आश्रय और डेटा-मैनेजमेंट का चक्र बिना रुकावट के चलता रहे.