Kedardham Pat: मध्य प्रदेश के गुना जिले के सुप्रसिद्ध और आस्था के केंद्र प्राचीन केदारनाथ धाम (ग्राम पंचायत महोदरा) के कपाट पिछले दो वर्षों से बंद होने के कारण श्रद्धालुओं और साधु-संतों का धैर्य अब जवाब दे गया है. कलेक्टोरेट में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब बड़ी संख्या में जिले के प्रमुख साधु-संत, महंत और षडदर्शन विश्व अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी लामबंद होकर जनसुनवाई में पहुंचे, संतों ने दो टूक शब्दों में जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि महाशिवरात्रि पर्व से पूर्व मंदिर के कपाट नहीं खोले गए और वार्षिक मेले की अनुमति नहीं दी गई, तो साधु-संत अखाड़ों के साथ मिलकर अपने आराध्य को मुक्त कराने के लिए स्वयं कूच करेंगे.
उठाए गए सवाल
साधु-संतों ने अपने ज्ञापन में प्रशासन की उस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं, जिसमें चट्टान चटकने के कारण हादसे की आशंका जताते हुए मंदिर को सील किया गया है. उन्होंने कहा कि मनगढ़ंत कहानी बनाकर दो वर्षों से दर्शन रोके गए हैं, जबकि इस अवधि में न तो कोई चट्टान गिरी और न ही प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कोई स्थाई निराकरण किया. मंदिर बंद होने से न केवल भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक परंपराएं भी खंडित हो रही हैं.
धाम पर हुई संतों की बैठक के बाद एक पंचनामा भी तैयार किया गया है, इस पंचनामे में स्पष्ट उल्लेख है कि शिवरात्रि मेले से पहले अगर कपाट नहीं खुले, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.
संतों ने स्पष्ट किया है कि वे माघ मेले की समाप्ति के बाद सीधे केदारनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेंगे और भगवान भोलेनाथ की सेवा-पूजा स्वयं प्रारंभ करेंगे.केदारनाथ धाम को लेकर पिछले वर्ष भी शहर के लक्ष्मीगंज से एक विशाल रैली निकाली गई थी. कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप कर कलेक्टर को पत्र लिखे हैं. भक्तों का कहना है कि जब अन्य पहाड़ी मंदिरों पर सुरक्षा इंतजामों के साथ दर्शन होते हैं, तो केदारनाथ धाम को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? मंगलवार को कलेक्टोरेट में साधु-संतों की भारी मौजूदगी ने प्रशासन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है.
ज्ञापन की प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, सचिव धार्मिक न्यास विभाग, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को भी भेजी गई हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन आस्था और सुरक्षा के बीच का रास्ता शिवरात्रि से पहले कैसे निकालता है.
षडदर्शन विश्व अखाड़ा परिषद के महंत राघवेंद्र दास जी महाराज के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि केदारनाथ धाम द्वापर युग के पांडवों के कालखंड की याद दिलाता है. राजतंत्र के समय से यहां महाशिवरात्रि पर विशाल मेला लगता आ रहा है, जिसे अचानक बंद करना समझ से परे है. संतों ने सवाल उठाया कि जब आध्यात्मिक आनंद विभाग और पुरातत्व विभाग जैसे भारी-भरकम सरकारी महकमे अस्तित्व में हैं, तो फिर मंदिर का संरक्षण करने के बजाय उसे सील क्यों किया गया? ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि संतों का यह आग्रह कहीं सत्याग्रह में न बदल जाए, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
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