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This Article is From Oct 15, 2025

पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह की कोठी विवाद, हाई कोर्ट ने कहा- सुनवाई का अधिकार नहीं

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोठी विवाद याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि इस Govind Singh Kothi dispute की सुनवाई का अधिकार सिविल कोर्ट के पास है. यह मामला लहार में सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण से जुड़ा है, जिसे लेकर Madhya Pradesh High Court verdict अब चर्चा में है.

पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह की कोठी विवाद, हाई कोर्ट ने कहा- सुनवाई का अधिकार नहीं

Govind Singh Kothi Case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के कोठी विवाद मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने गोविंद सिंह की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए साफ कहा कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार सिविल न्यायालय के पास है, न कि हाईकोर्ट के पास. 

लहार की कोठी को लेकर उठा विवाद

यह पूरा मामला भिंड जिले के लहार नगर के वार्ड क्रमांक 12, मेन रोड स्थित डॉ. गोविंद सिंह की कोठी से जुड़ा है. पिछले साल जुलाई 2024 में कुछ स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि कोठी के निर्माण के दौरान सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण किया गया है. इसके बाद प्रशासन ने जांच कर सीमांकन (नपती) कराया था. रिपोर्ट में पाया गया कि कोठी का कुछ हिस्सा सरकारी रोड पर बना है.

गोविंद सिंह के बेटे ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

सीमांकन रिपोर्ट आने के बाद डॉ. गोविंद सिंह के पुत्र अमित प्रताप सिंह ने राजस्व विभाग की इस कार्यवाही को गलत बताते हुए हाई कोर्ट का रुख किया. उन्होंने कहा कि सीमांकन गलत तरीके से किया गया है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए. इस पर ग्वालियर हाई कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं.

हाई कोर्ट ने कहा – सिविल कोर्ट का मामला

सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने साफ किया कि यह विवाद संपत्ति और राजस्व अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए इस पर फैसला सिविल कोर्ट ही कर सकता है. अदालत ने नगर पालिका को इस विवाद से बाहर करने का आदेश भी दिया. साथ ही यह भी कहा कि इस तरह के मामले स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते.

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लोगों ने की अतिक्रमण हटाने की मांग

गांव और आसपास के लोगों का कहना है कि यह रास्ता सार्वजनिक उपयोग का है, जिसे कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए. वहीं, डॉ. गोविंद सिंह के समर्थक अब भी सीमांकन रिपोर्ट को गलत बता रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में सीमांकन कराया था. 

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