विज्ञापन
This Article is From Apr 05, 2026

राज्यपाल मंगूभाई पटेल का मांडू दौरा: बाग प्रिंट कला को सराहा, जानिए इसका इतिहास और खासियत

Bagh Prints: राज्यपाल मंगूभाई पटेल मांडू पहुंचे और वहां बाग प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया को देखा. इस दौरान कलाकारों ने जानकारी दी कि एक कपड़े को तैयार करने में करीब 25 दिन का समय लगता है.

राज्यपाल मंगूभाई पटेल का मांडू दौरा: बाग प्रिंट कला को सराहा, जानिए इसका इतिहास और खासियत

Bagh Prints: मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने शनिवार को अपने मांडू प्रवास के दौरान यहां की विश्व प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला और ऐतिहासिक विरासत का करीब से अवलोकन किया. इस दौरान उन्होंने स्थानीय कलाकार नेहा जायसवाल के केंद्र पहुंचकर पारंपरिक बाग प्रिंट की बारीकियों को समझा और जनजातीय महिलाओं के कार्यों की सराहना की.

कपड़े को तैयार करने में लगता है 25 दिन का समय

राज्यपाल ने बाग प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया को देखा, जिसमें कपड़े को भिगोना, हरड़ा पाउडर का उपयोग और फिटकरी व हल्दी जैसे प्राकृतिक रंगों से डिज़ाइन तैयार करना शामिल है. कलाकार ने जानकारी दी कि एक कपड़े को तैयार करने में करीब 25 दिन का समय लगता है. इस अवसर पर राज्यपाल ने हथकरघा का फीता काटकर उद्घाटन भी किया. उन्होंने जनजातीय महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये महिलाएं न सिर्फ पारंपरिक कला को जीवित रख रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रेरणादायक कार्य कर रही हैं. साथ ही ‘रानी रूपमती हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट' के माध्यम से नए स्टार्टअप की पहल की जानकारी भी दी गई, जिस पर राज्यपाल ने शुभकामनाएं दीं.

इसके अलावा राज्यपाल ने मांडू के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर यहां की अद्वितीय स्थापत्य कला और प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली की सराहना की. उन्होंने रात्रि में आयोजित ‘लाइट एंड साउंड शो' का भी अवलोकन किया, जिसमें मांडू के इतिहास, सुल्तान बाजबहादुर और रानी रूपमती की प्रेम गाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया.

राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजनों से पर्यटकों को हमारे गौरवशाली अतीत को समझने में मदद मिलती है. राज्यपाल के दौरे के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे.

बाघ प्रिंट कला का इतिहास

बाघ प्रिंट की कहानी धार जिले के एक छोटे से गांव बाघ से शुरू हुई. माना जाता है कि करीब 400 साल पहले इस कला की शुरुआत हुई, जब सिंध से खत्री समुदाय के लोग इस गांव में आकर बसे. इस प्रिंट की खासियत ये है कि इसे लकड़ी के नक्काशीदार ब्लॉक्स से हाथों से छापा जाता है. वहीं इसे काला और लाल रंग से सफेद कपड़े पर उकेरे जाते हैं. ये रंग प्राकृतिक होते हैं. बाघ प्रिंट पर फूलों, पत्तियों, जानवरों और ऐतिहासिक इमारतों की पारंपरिक डिजाइन की जाती है. वहीं डिजाइन बनने के बाद बहते हुए नदी के पानी में धोया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि नदी के पानी में मौजूद खनिज इन रंगों की चमक को बढ़ाता है. बता दें कि साल 2008 में बाघ प्रिंट को ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग' मिला.

ये भी पढ़ें: Success Story: गाड़ी के बजाए साइकिल से पहुंचते हैं ऑफिस, सादगी है इनकी पहचान... जानिए सागर के SP दिनेश कौशल की कहानी

पूरी स्टोरी पढ़ें

MPCG.NDTV.in पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार,लाइफ़स्टाइल टिप्स हों,या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें,सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com