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Garbh Sanskar: घर‑घर गर्भ संस्कार का संकल्प; CM मोहन ने कहा- सरकारी अस्पताल में बनेंगे गर्भ संस्कार कक्ष

Garbh Sanskar Book Launch: मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृत्व सिर्फ जैविक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह संस्कारों का प्रारंभिक केंद्र है. आधुनिक विज्ञान भी यह सिद्ध कर चुका है कि गर्भस्थ शिशु पर मां की भावनाओं और बाहरी वातावरण का प्रभाव पांच से छह महीने बाद पढ़ने लगता है. उन्होंने महाभारत के अभिमन्यु और अन्य पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे.

Garbh Sanskar: घर‑घर गर्भ संस्कार का संकल्प; CM मोहन ने कहा- सरकारी अस्पताल में बनेंगे गर्भ संस्कार कक्ष
Garbh Sanskar: घर‑घर गर्भ संस्कार का संकल्प; CM मोहन ने कहा- सरकारी अस्पताल में बनेंगे गर्भ संस्कार कक्ष

Garbh Sanskar Book Launch: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (CM Dr Mohan Yadav) ने रविवार को इंदौर के डेली कॉलेज में आयोजित गर्भ संस्कार पुस्तक (Garbh Sanskar Pustak) विमोचन कार्यक्रम में कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान कभी अलग‑अलग नहीं रहे. सनातन व्यवस्था में जो संस्कार हैं, वे केवल धार्मिक आचरण नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक पद्धति हैं. उन्होंने कहा कि गर्भ में पल रहे शिशु को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संस्कारित करने की प्रक्रिया ही गर्भ संस्कार है, और अब प्रदेश में इसे व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा. इस दौरान उन्होंने गर्भ संस्कार को घर‑घर पहुंचाने का संकल्प भी दिलाया. कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास का सम्मान भी किया गया.

MP के शासकीय चिकित्सालयों में बनेंगे विशेष गर्भ संस्कार कक्ष : CM

मोहन यादव ने घोषणा की कि प्रदेश में बनने वाले हर नए शासकीय चिकित्सालय में गर्भ संस्कार कक्ष बनाए जाएंगे. वहीं, चिकित्सा विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार के अध्ययन‑अध्यापन की व्यवस्था भी की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.

मातृत्व केवल जैविक प्रक्रिया नहीं, संस्कारों की पहली पाठशाला : मोहन यादव 

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृत्व सिर्फ जैविक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह संस्कारों का प्रारंभिक केंद्र है. आधुनिक विज्ञान भी यह सिद्ध कर चुका है कि गर्भस्थ शिशु पर मां की भावनाओं और बाहरी वातावरण का प्रभाव पांच से छह महीने बाद पढ़ने लगता है. उन्होंने महाभारत के अभिमन्यु और अन्य पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे.

'आयुर्वेद को मिली मान्यता, गर्भ संस्कार को विज्ञान भी स्वीकार रहा'

मोहन यादव ने कहा कि आयुर्वेद की सामर्थ्य सर्वविदित है. कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए देश‑दुनिया ने आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं को अपनाया. आयुर्वेद में गर्भ संस्कार को महत्वपूर्ण माना गया है और अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसके लाभों को स्वीकार कर रहा है.

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