Bhind Protest: भिंड जिले के ग्वालियर-भिंड-इटावा NH-719 स्थित बरेठा टोल प्लाजा पर “नो रोड-नो टोल” आंदोलन के दौरान हुई गुंडागर्दी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. NDTV पर खबर प्रसारित होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया. इसके बाद पुलिस ने बीएसपी नेता रक्षपाल सिंह राजावत सहित तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. यह मामला टोल प्लाजा के मैनेजर अमित राठौर की शिकायत पर दर्ज किया गया है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (b), 351(2), 324(4) और 3(5) के तहत केस कायम किया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, NH-719 को सिक्स लेन बनाने की मांग को लेकर संत समाज द्वारा “नो रोड-नो टोल” आंदोलन चलाया गया था. इसी के तहत बरेठा टोल प्लाजा पर टोल फ्री करने की घोषणा की गई थी. लेकिन इस दौरान फास्टैग से वाहनों के पैसे कटने की शिकायत सामने आई, जिस से आंदोलनकारी भड़क गए. इसी मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ा और देखते ही देखते हंगामे में बदल गया.
BSP नेता पर गंभीर आरोप
शिकायत के मुताबिक, बीएसपी नेता रक्षपाल सिंह राजावत अपने समर्थकों के साथ टोल प्लाजा के कंट्रोल रूम में जबरन घुस गए. वहां मौजूद टोल प्लाजा के मैनेजर अमित राठौर ने बीएसपी नेता रक्षपाल पर जान से मारने की धमकी का आरोप लगाया है. साथ ही रक्षपाल ने कहा कि कैमरे बंद कर दिए जाएं, नहीं तो डंडा लेकर उन्हें तोड़ देंगे. कंट्रोल रूम से बाहर निकलते ही बूथ के बाहर लगे कैमरे को हाथ से तोड़ दिया गया. सेंसर भी टूट गया. यह पूरी घटना मौके पर मौजूद मीडिया के कैमरों में रिकॉर्ड हो गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया.
पुलिस से भी हुई थी तीखी बहस
घटना के दौरान मौके पर पुलिस बल मौजूद था, जिसने स्थिति को संभालने की कोशिश की. लेकिन आरोपियों ने पुलिस से भी बहस की और कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई. हालांकि, पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पाया और बाद में मामले की जांच शुरू की गई.
NDTV की खबर के बाद बढ़ा दबाव
इस घटना को लेकर जब NDTV पर खबर प्रसारित हुई, तो प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया. इसके बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज और शिकायत के आधार पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली.
शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील हुई बेअसर
संत समाज समिति के जिला अध्यक्ष कालिदास महाराज ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की थी. वे स्वयं संतों के साथ धरने पर बैठे थे, लेकिन कुछ लोगों की आक्रामकता के चलते स्थिति बिगड़ गई.
राजनीतिक समर्थन से बिगड़ा माहौल
इस आंदोलन को बीएसपी, कांग्रेस, पूर्व सैनिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन समर्थन की आड़ में हुई इस घटना ने पूरे आंदोलन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. इसके साथ ही वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं. अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है. जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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