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अलीराजपुर दौरे पर CM मोहन यादव, शहीद चंद्रशेखर आजाद के गांव जाएंगे; भगोरिया उत्सव में भी होंगे शामिल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शुक्रवार को आलीराजपुर जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां वे अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर पुष्प अर्पित करेंगे और करोड़ों रुपये की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण करेंगे.

अलीराजपुर दौरे पर CM मोहन यादव, शहीद चंद्रशेखर आजाद के गांव जाएंगे; भगोरिया उत्सव में भी होंगे शामिल

CM Mohan Yadav Alirajpur Visit: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शुक्रवार को आलीराजपुर जिले के दौरे पर रहेंगे. वह अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर पुष्प अर्पित करेंगे. इसके अलावा वह करोड़ों रुपये की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण करेंगे. सीएम चन्द्रशेखर आजाद नगर में जनसभा को भी संबोधित करेंगे. वह उदयगढ़ भगोरिया में होने वाले कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे.

अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा (अब  चन्द्रशेखर आजाद नगर) गांव में हुआ था. चंद्रशेखर आजाद ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय साहस और त्याग का परिचय दिया. 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से घिर जाने पर उन्होंने वीरतापूर्वक मुकाबला किया और उनसे लड़ते हुए शहीद हो गए थे.

परियोजनाओं को भी सौंपेंगे सीएम

सबसे पहले सीएम इसी गांव में आजाद स्मृति मंदिर पहुंचकर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके मंडी प्रांगण में संबोधित करेंगे. सीएम कुल 79.92 करोड़ रुपये लागत के 14 कार्यों का लोकार्पण और 119.02 करोड़ रुपये लागत के 35 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे. इन विकास परियोजनाओं से क्षेत्र में विकास को नई गति मिलेगी.

क्या है भगोरिया उत्सव

इसके बाद मुख्यमंत्री उदयगढ़ के भगोरिया में आयोजित पारंपरिक भगोरिया उत्सव में सम्मिलित होंगे. बता दें कि भगोरिया हाट जनजातीय अंचल का लोकप्रिय और ऐतिहासिक लोकपर्व है, जो विशेष रूप से भील जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है. होली पर्व के पूर्व आयोजित होने वाला यह उत्सव केवल एक हाट-बाजार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक उल्लास और पारंपरिक मूल्यों का जीवंत उत्सव है.

भगोरिया अपने रंग, उमंग और परंपराओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है. पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषणों से सजे युवक-युवतियां, मांदल और ढोल की थाप पर थिरकते समूह नृत्य, लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियां तथा रंग-गुलाल से सराबोर वातावरण पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना देता है. यह पर्व सामाजिक मेल-जोल, आपसी परिचय और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है.

यह पर्व जनजातीय जीवन शैली, परंपरागत कला एवं लोक विरासत के संरक्षण का सजीव उदाहरण है. मुख्यमंत्री का यह प्रवास न केवल सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि जनजातीय समाज के साथ सरकार की आत्मीयता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.

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