भिंड में नगर पालिका का एक ठेका अब बड़े विवाद का कारण बन गया है. शहर के गौरी तालाब से जलकुंभी हटाने के लिए दिए गए लाखों रुपये के ठेके में कथित तौर पर नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का मामला सामने आया है. स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली और ठेकेदार की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
बताया जा रहा है कि गौरी तालाब की सफाई और जलकुंभी हटाने का करीब 15 लाख 33 हजार रुपये का ठेका “विष्णु नेटवर्किंग” फर्म को दिया गया था, जिसका संचालन ठेकेदार धीरेंद्र सिंह कुशवाह कर रहे हैं. आरोप है कि ठेका मिलने के कुछ ही दिनों बाद तालाब में सफाई कार्य शुरू करा दिया गया और इस काम में कम उम्र के लड़कों को तालाब में उतार दिया गया.
वायरल वीडियो में कुछ लड़के तालाब के भीतर जलकुंभी हटाते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई. लोगों का कहना है कि तालाब में उतरकर सफाई करना बेहद जोखिम भरा काम है और यदि कोई हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता.
मामले पर सफाई देते हुए नगर पालिका सीएमओ यशवंत वर्मा ने कहा कि काम नाबालिग बच्चों से नहीं बल्कि 18 साल से अधिक उम्र के युवकों से कराया जा रहा था. उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच के लिए हेल्थ ऑफिसर (HO) राजीव जैन को मौके पर भेजा गया है. लेकिन विवाद उस समय और बढ़ गया जब हेल्थ ऑफिसर ने मीडिया से बातचीत में सीएमओ के दावे को ही गलत बता दिया. HO ने साफ कहा कि वह मौके पर गए ही नहीं थे क्योंकि उस समय वे ग्वालियर में मौजूद थे. उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा कोई जांच नहीं की गई.
हेल्थ ऑफिसर ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बिना अनुबंध और कार्य आदेश के किसी भी ठेकेदार द्वारा काम शुरू नहीं कराया जा सकता. नियमों को नजरअंदाज कर पहले काम शुरू करना गलत है. यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित फर्म और ठेकेदार की होगी.
HO ने यह भी खुलासा किया कि वीडियो वायरल होने के बाद ठेकेदार ने काम कर रहे लड़कों को बदल दिया है. इस बयान के बाद अब यह मामला केवल नाबालिगों से काम कराने तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था और ठेका प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग पूछ रहे हैं कि आखिर लाखों रुपए के सरकारी काम में सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी क्यों की गई. अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है.