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छिंदवाड़ा जहरीला कफ सिरप मामला, हाईकोर्ट में आरोपियों की जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

मामले में परासिया निवासी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को पुलिस ने 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि उनके द्वारा लिखे गए नुस्खे पर बच्चों को दिया गया कोल्ड्रिफ कफ सिरप जहरीला था, जिसके सेवन से जिले में 30 मासूम बच्चों की जान चली गई.  

छिंदवाड़ा जहरीला कफ सिरप मामला, हाईकोर्ट में आरोपियों की जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

छिंदवाड़ा जिले के चर्चित जहरीले कफ सिरप प्रकरण में गिरफ्तार चारों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार 2 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी हो गई. न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की 14वीं सुनवाई के दौरान आरोपियों, राज्य शासन और पीड़ित पक्ष की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं.

मामले में परासिया निवासी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को पुलिस ने 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि उनके द्वारा लिखे गए नुस्खे पर बच्चों को दिया गया कोल्ड्रिफ कफ सिरप जहरीला था, जिसके सेवन से जिले में 30 मासूम बच्चों की जान चली गई.  

कफ सिरप ज्योति सोनी के मेडिकल स्टोर से बेचा गया था

इस प्रकरण में परासिया की एडीजे अदालत ने 8 अक्टूबर 2025 को डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की. पुलिस जांच के दौरान डॉ. सोनी की पत्नी ज्योति सोनी, उनके भतीजे राजेश सोनी और मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट सौरभ कुमार जैन को भी आरोपी बनाया गया. जांच में सामने आया है कि जहरीला कफ सिरप ज्योति सोनी के मेडिकल स्टोर से बेचा गया था. इस आधार पर पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया. सभी आरोपियों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग जमानत याचिकाएं दाखिल की हैं. 

हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार

सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और शशांक शेखर ने पक्ष रखा. वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह तथा शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी ने जमानत का विरोध किया. मृत बच्चों की ओर से आपत्तिकर्ता अश्मिता चांद की तरफ से अधिवक्ता केके पांडेय ने अदालत में दलीलें प्रस्तुत कीं. अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस संवेदनशील मामले में आरोपियों को जमानत मिलेगी या उन्हें अभी न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा. 

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