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Chaitra Navratri: उज्जैन के इस मंदिर में दर्शन से मिलती है मां की विशेष कृपा, पूरी होती है मनचाही मुराद, विक्रमादित्य से जुड़ी है कथा

Chaitra Navratri 2026: उज्जैन में विराजित हरसिद्धि माता का मंदिर अत्यंत पवित्र माना जाता है. ये 51 शक्तिपीठों में शामिल है और ये सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी भी रही हैं.

Chaitra Navratri: उज्जैन के इस मंदिर में दर्शन से मिलती है मां की विशेष कृपा, पूरी होती है मनचाही मुराद, विक्रमादित्य से जुड़ी है कथा

Chaitra Navratri 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन में कई प्रसिद्ध देवी मंदिर है, लेकिन विशेष महत्व प्रसिद्ध हरसिद्धि माता का हैं. यही वजह है कि चैत्र नवरात्रि लगते ही गुरुवार सुबह हरसिद्धि मंदिर में घट स्थापना के साथ पर्व की शुरू हो गई. पहले दिन शैल पुत्री माता का पूजन किया गया. वहीं शाम में 51 फीट ऊंची दीपमाला प्रज्वलित की जाएगी.

मां हरसिद्धि हैं विराजित

विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से 200 मीटर की दूरी पर 51 शक्तिपीठ में से एक हरसिद्धि माता मंदिर स्थित है. सम्राट विक्रमादित्य की कुल देवी माने जाने वाला यह माता मंदिर करीब 2 हजार साल पूर्व परमार कालीन बताया जाता है. नवरात्रि के पहले दिन सुबह चार बजे पुजारियों ने मंदिर के पट खोल माता की पूजा की फिर 8 बजे शैल पुती की पूजाकर घट स्थापना की ओर नवरात्रि पर्व की शुरुआत हुई. बता दें कि हरसिद्धि मंदिर में अब 27 मार्च तक क्रमानुसार नौ देवियों की पूजा की जाएगी.

इसलिए माना जाता है शक्तिपीठ 

महंत रामचंद्र गिरी के अनुसार, महाकालेश्वर मंदिर के सामने विराजित हरसिद्धि माता का मंदिर अत्यंत पवित्र माना जाता है. ये 51 शक्तिपीठों में शामिल है. इतना ही नहीं सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी भी रही हैं. कहा जाता है कि यहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, इसलिए इसे मंगल चंडी शक्ति (Mangal Chandi Shakti) का स्थान कहा जाता है. माता हरसिद्धि ने भगवान शिव के आदेश पर देवताओं को शस्त्र प्रदान कर दानवों के संहार में उनकी सहायता की. इसलिए यह सिद्धपीठ खास महत्व रखता है.

 जलती है विशेष दीपमालिका

हरसिद्धि  मंदिर में सबसे आकर्षण का केंद्र सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित दीपमाला हैं. करीब 51 फीट ऊंचे इन दोनों दीप स्तंभ पर 1 हजार 11 दीपक हैं. पहले इन्हें सिर्फ नवरात्री में जलाया जाता था. श्रद्धालुओं की बुकिंग के कारण अब इसे प्रतिदिन प्रज्वलित की जाती हैं. मान्यता है कि जब संध्याकालीन पूजा के दौरान दीप प्रज्जवलित करते वक्त माता के सामने कोई मनोकामना की जाती हैं तो वह पूर्ण हो जाती है. यही वजह है कि नवरात्रि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दीपमाला जलाने पहुंचते हैं.

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