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पीतांबरा शक्ति पीठ में चैत्र नवरात्र का पहला दिन: सुबह से भक्तों की उमड़ी भीड़, शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं मां बगलामुखी

Chaitra Navratri 2026: आज चैत्र नवरात्र का पहला दिन है. मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित प्रसिद्ध तांत्रिक शक्ति पीठ पीतांबरा मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है. नवरात्र के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, ऐसे में दतिया प्रशासन भी अलर्ट मोड में है.

पीतांबरा शक्ति पीठ में चैत्र नवरात्र का पहला दिन: सुबह से भक्तों की उमड़ी भीड़, शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं मां बगलामुखी

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र की आज से शुरूआत हो गई है‌. नवरात्र में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का विधान है. इसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ होती है. इस दिन कलश स्थापना के बाद ही लोग उपवास और देवी की विधिवत पूजा आरंभ करते हैं. हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है और इसे मां दुर्गा की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

तांत्रिक शक्ति पीठ पीतांबरा मंदिर में चैत्र नवरात्रि की धूम

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है. भक्त व्रत रखकर और विधि-विधान से पूजा कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में की गई पूजा, जप और तप का कई गुना फल प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.

पहले दिन सुबह के समय कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त माना गया है, जिसके साथ ही घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है और दुर्गा सप्तशती पाठ का आरंभ होता है. इधर, मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित प्रसिद्ध तांत्रिक शक्ति पीठ पीतांबरा मंदिर में भी चैत्र नवरात्रि की धूम है. 

मां पीतांबरा के दरबार में पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना

बता दें कि दतिया का पीतांबरा मंदिर जप, तप और साधना के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है. यही वजह है कि नवरात्रि के पहले दिन ही देशभर से भक्त पहुंच रहे हैं. सुबह से ही साधकों ने संकल्प लेकर पूजा-पाठ और अनुष्ठान शुरू कर दिया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.

यहां विराजित मां बगलामुखी देवी, जिन्हें मां पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि मां पीतांबरा देवी हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई थीं. जब भगवान विष्णु दैत्यों से घिर गए थे, तब उन्होंने मां बगलामुखी का आवाहन किया, जिसके बाद देवी ने प्रकट होकर संकट का नाश किया. मान्यता है कि कलयुग में मां बगलामुखी की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

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