Madhya Pradesh Health Services: मध्य प्रदेश के सिंगरौली (Singrauli) जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावों की कलई खोल दी है. हालत ये है कि सरकार जिसे 'आरोग्य मंदिर' कहती है, वहां लगे तालों ने एक नवजात की जान ले ली. यह केवल एक दरवाजा बंद होने की बात नहीं है, बल्कि एक व्यवस्था के दम तोड़ने की कहानी है.
सिंगरौली के चितरंगी क्षेत्र के लमसरई गांव में सिस्टम की संवेदनहीनता का सबसे वीभत्स चेहरा देखने को मिला. दरअसल, यहां एक गर्भवती महिला को जब प्रसव पीड़ा हुई, तो परिजन उम्मीद के साथ उसे गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. लेकिन वहां इलाज के बजाय उन्हें गेट पर लटका एक भारी ताला मिला. आरोप है कि केंद्र बंद होने के कारण महिला को मजबूरन मुख्य द्वार पर ही प्रसव करना पड़ा. इस दौरान सही समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण नवजात ने दम तोड़ दिया. इंसानियत तो तब और शर्मसार हो गई, जब प्रसव के बाद की गंदगी भी परिजनों को खुद साफ करनी पड़ी.
कागजों पर 'आरोग्य' और जमीन पर सन्नाटा
NDTV की जमीनी पड़ताल में यह साफ हुआ कि लमसरई की घटना कोई इकलौता हादसा नहीं है, बल्कि यह जिले भर में फैली अव्यवस्था संकट को बढ़ा रहे हैं. जिले के विभिन्न गांवों में बने स्वास्थ्य केंद्रों जैसे बिहरा, जिर, बिंदुल और पोड़ी पाठ इन सभी गांवों के आरोग्य मंदिरों में जो एक ही समानता मिली, वह है मुख्य द्वार पर लटके ताले. जिर गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर लगा ताला जंग खा चुका है, जो यह बताने के लिए काफी है कि इसे महीनों या शायद सालों से खोला नहीं गया है. खिड़कियों पर जाले और चारों तरफ गंदगी का अंबार स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत बयां कर रहा है.
"भवन तो है, पर डॉक्टर व नर्स का पता नहीं"
स्थानीय निवासी गणेश सिंह के अनुसार, सरकार ने भवन तो खड़े कर दिए हैं, लेकिन उनमें जान फूंकने वाला स्टाफ नदारद है. ग्रामीणों को छोटी छोटी बीमारियों या आपातकालीन स्थिति के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर माडा या बैढ़न जाना पड़ता है. लोगों का कहना है कि यदि ये केंद्र नियमित रूप से खुलें, तो गरीब ग्रामीणों को शहर की ओर नहीं भागना पड़ेगा और समय पर इलाज मिलने से जानें बचाई जा सकेंगी.
सीएमएचओ की रहस्यमयी 'मीटिंग्स'
जब इस पूरी बदहाली और लमसरई कांड पर जवाब मांगने के लिए स्वास्थ्य विभाग के मुखिया (CMHO) से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वह लगातार नदारद मिले. दो दिनों तक कोशिश करने के बावजूद हर बार यही जवाब मिला कि 'साहब मीटिंग में व्यस्त हैं'. सवाल यह उठता है कि अगर सिस्टम के जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी बैठकों में व्यस्त रहेंगे, तो जमीन पर मरते बच्चों और लाचार माताओं की सुध कौन लेगा?
सिंगरौली स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा: एक नजर में
सिंगरौली जिले में सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्वास्थ्य नेटवर्क काफी विस्तृत है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता शून्य नजर आती है. यहां 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC, 227 उप स्वास्थ्य केंद्र (Sub Health Centers) और 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हैं.
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इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कलेक्टर गौरव बेनल ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने बताया कि लमसरई मामले में लापरवाही साफ तौर पर उजागर हुई है और मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है. कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है. हालांकि, जिले के लोग अब यह देख रहे हैं कि कलेक्टर के औचक निरीक्षण और इन नोटिसों का असर कब तक उन बंद तालों को खोलने में कामयाब होता है.