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This Article is From Aug 29, 2025

शिवपुरी नगर पालिका में करोड़ों का घोटाला उजागर, वर्तमान और दो पूर्व CMO सस्पेंड; अध्यक्ष पर भी लटकी तलवार

शिवपुरी नगर पालिका में 57 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें वर्तमान और दो पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शामिल हैं. इन तीनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और उन पर जांच बैठाई गई है.

शिवपुरी नगर पालिका में करोड़ों का घोटाला उजागर, वर्तमान और दो पूर्व CMO सस्पेंड; अध्यक्ष पर भी लटकी तलवार

Madhya Pradesh Hindi News: शिवपुरी नगर पालिका (Shivpuri Nagar Palika) में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे और राजनीतिक विवाद के चलते अब सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. इस मामले में नगर पालिका के वर्तमान और दो पूर्व सीएमओ को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही उन पर जांच बैठाई गई है. इतना ही नहीं नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा पर भी कार्रवाई का शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है. जांच में पता चला है कि नगर पालिका में पिछले तीन वर्षों में अलग-अलग तीन सीएमओ ने अपने कार्यकाल में फाइलों में घपलेबाजी कर 57 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया है. यह घोटाला तब उजागर हुआ, जब 18 पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था.

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नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल के कमिश्नर संकेत भौंडवे ने तीनों सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच का आदेश दिया है. इनमें वर्तमान सीएमओ इशांत धाकड़ के अलावा पूर्व सीएमओ केशव सगर और शैलेश स्वास्थ्य शामिल हैं.

नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा पर भी खतरे के बादल

शिवपुरी जिला कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी पिछले दिनों नगर पालिका की जांच करते हुए एक और जांच रिपोर्ट तैयार की थी. इस रिपोर्ट में नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को भी दोषी पाया गया है. उन पर भी जल्द कार्रवाई की संभावना है. जांच में पता चला कि 2022 से अब तक 743 कार्य स्वीकृत किए गए. इन कार्यों की कुल लागत 54.80 करोड़ रुपये थी. रिपोर्ट में सामने आया है कि इस दौरान खूब गड़बड़ी की गई.

ठेकेदारों को भुगतान करने में गड़बड़ी

कई काम या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए हैं. साथ ही साथ भुगतान में भी बड़ी गड़बड़ियां मिलीं हैं. जांच में सामने आया कि कुछ ठेकेदारों को एक-दो माह में भुगतान कर दिया गया. वहीं, कई ठेकेदार लंबे समय से भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं. परिषद और पीआईसी की बैठकों में वित्तीय स्थिति की अनदेखी की गई है. 

जांच रिपोर्ट में उजागर हुए तथ्यों के अनुसार, बजट प्रावधानों को नजर अंदाज करते हुए करोड़ों के प्रस्ताव पास कर दिए गए. एक-एक लाख की फाइल बनाकर फर्जी भुगतान कराए गए. कई फाइलें नगर पालिका कार्यालय की बजाय अध्यक्ष के घर से संचालित की गईं, जिन पर अध्यक्ष ने अपनी तरफ से भुगतान करने की अनुमति देते हुए मामले में खुद को शक के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी अब जांच की जा रही है.

जांच में पता चला है कि भवन निर्माण स्वीकृति पोर्टल पर 55 प्रकरण समय सीमा से बाहर लंबित मिले. आयुक्त भोंडवे ने इन सभी अनियमितताओं को देखते हुए कार्रवाई की है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होगी.

पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा

अगर जांच में घोटाला उजागर और जांच का दायरा बढ़ा तो पार्षदों की बात सिद्ध हो जाएगी, जो पहले से ही उनके खिलाफ मोर्चा तैयार लिए बैठे हैं. 18 पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया है. इस्तीफा देने वाले पार्षदों में 12 भाजपा के हैं, जबकि चार पार्षद कांग्रेस तो दो पार्षद निर्दलीय हैं.

भ्रष्टाचार पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

बता दें कि शिवपुरी नगर पालिका में फर्जी भुगतान करने के मामले में पहले ही दो इंजीनियर सहित एक ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो चुकी है. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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