Virtual Autopsy: एम्स भोपाल में शवों के चीर-फाड़ वाले पांरपरिक पोस्टमार्ट्म के दिन लदने वाले हैं. जल्द एम्स भोपाल में वर्चुअल ऑटोप्सी यानी बिना सर्जिकल कट के पोस्टमार्टम की तैयारी चल रही है. वर्चुअल ऑटोप्सी की तरफ कदम बढ़ाने से भोपाल एम्स देश के उन चुनिंदा शहरों में शुमार हो जाएगा, जहां वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा उपल्ब्ध होगी.
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CT स्कैन और 3D इमेजिंग जैसी तकनीकों का उपयोग
गौरतलब है वर्चुअल ऑटोप्सी की यह तकनीक स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, नार्वे सहित कई देशों में पहले ही शुरू हो चुकी है. इसमें मृत शरीर को खोले बिना आंतरिक अंगों, हड्डियों और चोटों का विस्तृत विश्लेषण CT स्कैन और 3D इमेजिंग जैसी तकनीकों का उपयोग से मृत्यु का कारण पता चलता है और इससे नतीजे तेज और सटीक मिलते हैं.
देश के चुनिंदा शहरों में शामिल होगा राजधानी भोपाल
वर्चुअल ऑटोप्सी की शुरूआत के बाद भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शुमार हो जाएगी, जहां अभी यह सुविधा होगी. इसके लिए भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी में पेश प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है. अब वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल के समक्ष प्रस्ताव देंगे, जिसके बाद फंड जारी किया जाएगा.
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बारीक से बारीक चोटों को पकड़ेगा वर्चुअल ऑटोप्सी
उल्लेखनीय है डिजिटल फॉर्मेट वाले वर्चुअल ऑटोप्सी के डेटा को भविष्य में किसी भी समय देखा और विश्लेषित किया जा सकता है, जिससे सबूतों की विश्वसनीयता बढ़ेगी. इस तकनीक में बारीक से बारीक चोटों और हड्डियों के फ्रैक्चर को पकड़ा जा सकता है, जो पारंपरिक तरीकों में छूट जाते हैं.

अंगों व चोटों की डिजिटल तस्वीरों से सटीक विश्लेषण
वर्चुअल ऑटोप्सी एक गैर-आक्रामक प्रक्रिया होती है. इसमें CT स्कैन, MRI और 3D इमेजिंग का उपयोग करके शवों के अंदरूनी अंगों और चोटों की डिजिटल तस्वीरें ली जाती हैं, जिससे शवों को बिना काटे-छांटे ही चोटों, फ्रैक्चर और आंतरिक समस्याओं का पता लगाया जा सकता है. इससे मेडिकल जांच में मदद और लीगल जांच में शीघ्रता आती है.
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने किया समर्थन
एम्स का फॉरेंसिक विभाग इस तकनीक पर काम कर रहा है और इसके लिए जरूरी CT स्कैन मशीनें और इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की योजना है. अचानक और अस्पष्ट मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) भी इसका समर्थन कर रही है.
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