Bhind Retired Soldier Protest: भिंड जिले में पूर्व सैनिकों के साथ कथित अन्याय और अत्याचार के बढ़ते मामलों को लेकर अब आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है. देश की सीमाओं पर अपनी जान जोखिम में डालने वाले पूर्व सैनिक अब खुद न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. इसी नाराजगी के चलते भिंड जिले के बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक ग्वालियर स्थित आईजी कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की. प्रदर्शन के दौरान पूर्व सैनिकों ने आईजी के उपस्थित नहीं होने पर डीएसपी अखिलेश पुरी गौस्वामी को आईजी के नाम ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में उन्होंने कई गंभीर मामलों का जिक्र करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.
एक साल बाद भी नहीं मिला न्याय
पूर्व सैनिकों ने सबसे प्रमुख रूप से अटेर विधानसभा क्षेत्र के कल्याणपुरा गांव में हुई सनसनीखेज वारदात को उठाया. 15 अप्रैल 2025 को पूर्व सैनिक हरिदास देपुरिया के घर डकैती की घटना हुई थी, जिसमें उनकी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. पीड़ित परिवार और पूर्व सैनिकों का आरोप है कि घटना को एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन पुलिस अब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है. इससे न सिर्फ पीड़ित परिवार में आक्रोश है, बल्कि पूरे पूर्व सैनिक समुदाय में गहरी नाराजगी बनी है.
पुलिस पर लापरवाही का आरोप
पूर्व सैनिक कल्याण संगठन के जिला अध्यक्ष सूबेदार मेजर राम अवतार सिंह परमार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है. उनका कहना है कि बार-बार शिकायत और गुहार के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हैं.
कारगिल योद्धा के साथ मारपीट का मामला भी गरमाया
प्रदर्शन के दौरान एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया. कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक राकेश सिंह के साथ लाईन अटैच मिहोना थाना टीआई विजय कैन के द्वारा कथित मारपीट और गाली गलौज किया गया. पूर्व सैनिकों का आरोप है कि इस घटना की शिकायत के बावजूद संबंधित टीआई के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. इससे पुलिस की निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
लगातार बढ़ रहे अत्याचार के मामले
पूर्व सैनिकों का कहना है कि यह कोई एक या दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि लगातार उनके साथ अन्याय और दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा, जिससे वे खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
आंदोलन की चेतावनी
पूर्व सैनिकों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक उन्हें न्याय नहीं मिला और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे भोपाल स्थित डीजीपी कार्यालय का घेराव करेंगे. उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन बड़े स्तर पर होगा और पूरे प्रदेश के पूर्व सैनिक इसमें शामिल होंगे.
प्रशासन पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. एक तरफ जहां पूर्व सैनिक न्याय की मांग को लेकर लामबंद हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस पर लगे आरोप उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं. देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व सैनिकों का इस तरह सड़कों पर उतरना प्रशासन के लिए एक गंभीर संकेत है. यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन प्रदेश स्तर पर बड़ा रूप ले सकता है.
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