Bageshwar Baba: बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपनी कथा के दौरान भावुक नजर आए. हिंदुओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा, "मैं भारत के हिंदुओं के लिए अपनी किडनी तक बेच दूंगा, लेकिन तुम्हें गरीबी या इलाज के लिए धर्म परिवर्तन नहीं करने दूंगा." उन्होंने साफ किया कि उनका उद्देश्य केवल कथा करना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना है.
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन रविवार को बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण, मंदिरों की सरकारी अधीनता और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी. कथा के दौरान उन्होंने कई सामाजिक मुद्दों पर लोगों से अपील भी की.
बाबा बागेश्वर ने कहा कि उन्हें "सेवा वाला बाबा" बनना है. कथाओं से प्राप्त धन से भव्य मंदिर नहीं, बल्कि अत्याधुनिक अस्पताल बनाए जा रहे हैं. उन्होंने इसके पीछे कारण बताते हुए कहा कि गरीबों को मुफ्त इलाज का लालच देकर अक्सर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है. इसी भावुक क्षण में उन्होंने कहा, "मैं तुम्हारे लिए अपनी किडनी तक बेच दूंगा, लेकिन मजबूरी में अपना धर्म मत छोड़ना."
बांग्लादेश की घटनाएं रूह कंपा देने वाली
कथा के दौरान बाबा बागेश्वर ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का भी जिक्र किया. उन्होंने एक विधवा महिला और 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई अमानवीय घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएं रूह कंपा देने वाली हैं. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ हिंदू-मुस्लिम का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों, उनकी जमीनों और घरों की सुरक्षा का सवाल है. इसी चिंता के कारण वे पदयात्राएं कर रहे हैं और चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं.
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत सरकार से देश के मंदिरों को सरकारी अधीनता से मुक्त करने की मांग की. उन्होंने कहा कि देश में हजारों करोड़ रुपये के मंदिर हैं, लेकिन केवल मंदिरों के बड़े होने से धर्मांतरण नहीं रुक रहा. उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिरों के चढ़ावे का उपयोग गरीब हिंदू बेटियों के घर बसाने, उनकी शादी कराने और समाज कल्याण के कार्यों में किया जाना चाहिए.