
Latest News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोकनगर (Ashoknagar) जिले की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी (Chanderi Gaon) में हर त्योहार अपने अलग अंदाज में मनाया जाता है. इसी क्रम में मंगलवार को तीन दिवसीय गणगौर उत्सव (Gangaur Festival) प्रारंभ हुआ. सैकड़ों वर्षों से चले आ रहे गणगौर उत्सव की परंपरा के अनुसार, शिव और पार्वती की मूर्तियों को सोने-चांदी के आभूषण पहनाकर नगर के मुख्य मार्गों से बाहर से आई नृत्यांगनाओं के साथ भव्य शोभायात्रा निकालकर मां जागेश्वरी मेला स्थल पहुंचती है. यह उत्सव तीन दिनों तक चलता है.

गणगौर उत्सव की धूम
क्या है गणगौर उत्सव?
वैसे तो मूलतः यह उत्सव राजस्थान का है. लेकिन, एमपी के चंदेरी में यह अनोखा उत्सव 150 से भी अधिक वर्षों से पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. गणगौर उत्सव की शुरुआत फूटाकुआ मोहल्ला में भार्गव परिवार के यहां से दो जोड़ी भगवान शिव और पार्वती के जोड़ो के उठने से होती है. यहां शिव और पार्वती की मूर्तियों की नपाध्यक्ष संतोष कोली, थाना प्रभारी मनीष जादोन, नायव तहसीलदार शिवानी गुप्ता द्वारा विशेष पूजा अर्चना की गई.
मां जागेश्वरी मेले तक शोभायात्रा
पूजा होने के बाद बाहर से आई नृत्यांगनाओं ने भगवान शिव और पार्वती के राजसी भेस भूषा में होने के कारण नृत्य की प्रस्तुति दी. फूटा कुआ से गणगौर के रूप में शिव और पार्वती की मूर्तियों को महिलाओं ने सिर पर रखकर पूरे शहर का भ्रमण कराया. शाम के समय मां जागेश्वरी मेले में पहुंची, जहां आसपास के क्षेत्रों से मेला देखने आये लोगों ने देर रात तक गणगौर उत्सव का लुत्फ़ उठाया.
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मूर्तियों की कड़ी सुरक्षा
सुरक्षा की दृष्टि से गणगौर की मूर्तियां लाखों रुपये के आभूषण पहने रहती है. इस वजह से उनकी सुरक्षा में पूरे रास्ते पर गार्ड हथियारों के साथ मौजूद रहते हैं. साथ ही, काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाता है, जो पूरे समय गणगौर के साथ रहता है.
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