डॉ आंबेडकर विवाद में पांच दिन पहले गिरफ्तार एडवोकेट अनिल मिश्रा को बुधवार शाम ग्वालियर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा कर दिया. उनकी रिहाई के वक्त बड़ी संख्या में लोग जेल के बाहर पहुंचे और उनका स्वागत किया. अनिल मिश्रा ने अपनी गिरफ्तारी और अपने खिलाफ हाइकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की थी.
खंडपीठ में डबल बेंच ने शनिवार और रविवार को अवकाश के दिन और सोमवार को भी सुनवाई की, लेकिन फैसला सुनिश्चित कर लिया था. बुधवार को कोर्ट का फैसला आया. कोर्ट ने एफआईआर को सही माना. हालांकि कोर्ट ने गिरफ्तारी को गलत माना.
सीजेएम कोर्ट में भरा 1 लाख का बॉन्ड
हाइकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए अनिल मिश्रा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. उनसे कहा गया कि वे सीजेएम कोर्ट में जाकर एक लाख रुपये का बॉन्ड भरकर जमानत लें.
इसके बाद मिश्रा के अभिभाषक ने सीजेएम कोर्ट से जमानत की औपचारिकताओं को पूरा किया, फिर परवाना जेल पहुंचे. वहां से आठ बजे उन्हें जेल से रिहा किया गया. इस मौके पर उनका स्वागत करने बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद थे.
कोर्ट ने 14 जनवरी तक भेजा था जेल
बता दें कि JMFC मधुलिका खत्री की कोर्ट ने अनिल मिश्रा और तीन अन्य लोगों को 14 जनवरी तक जेल भेजा था. मिश्रा समेत सात लोगों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने का आरोप है. चार दिन से सभी जेल में बंद थे.