World Hindi Day 2026: "हिंदी भाषा ही नहीं भावों की अभिव्यक्ति है, सदियों से हर भारतीय के शब्दों की शक्ति है." भारत की अनेकता को एकता के सूत्र में पिरोने वाली हिंदी आज मात्र देश तक सीमित नहीं है. यह विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जो हमारे पारंपरिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है. हर साल 10 जनवरी को 'विश्व हिंदी दिवस' हर भारतीय को हिंदी भाषा की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक महत्व पर गर्व के साथ हिंदी के विस्तार के लिए और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.
विचारों की अभिव्यक्ति,
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) January 10, 2026
संस्कृतियों का संगम और
भारत की वैश्विक पहचान - हिंदी।
संवाद को सशक्त बनाती, विश्व को जोड़ती हिंदी। आप सभी देशवासियों को विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। #विश्व_हिंदी_दिवस#WorldHindiDay pic.twitter.com/4ej5ZluRLI
वैश्विक महत्व
गौरवान्वित महसूस होता है, जब हिंदी यूनेस्को की 9 कामकाजी भाषाओं में से एक के रूप में चुनी और गिनी जाती है. बहुत सरल, सहज और सरल भाषा होने के साथ हिंदी ऐसी वैज्ञानिक भाषा है, जिसे दुनियाभर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं. आज दुनिया में 100 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलते या समझ लेते हैं.
भारत में पहली बार हिंदी दिवस वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को मनाया था. तभी से यह दिवस 'विश्व हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाता रहा है.
संविधान में हिंदी
संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 21 भाषाओं के साथ हिंदी का एक विशेष स्थान है. हिंदी के विकास के लिए खासतौर से राजभाषा विभाग का गठन किया गया. भारत सरकार का राजभाषा विभाग इन प्रयासों में जुटा है कि केंद्र सरकार के अधीन कार्यों में अधिक से अधिक काम हिंदी भाषा में हों.
पिछले एक दशक में भारत सरकार ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. खासकर संयुक्त राष्ट्र व अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसकी मान्यता और इसके प्रयोग को बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए गए हैं. सितंबर 2024 में ‘बहुभाषिकता' पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव में हिंदी भाषा का उल्लेख किया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग को प्रोत्साहित किया गया कि वे अपने महत्वपूर्ण संचार और संदेशों का प्रसार हिंदी समेत आधिकारिक और गैर-आधिकारिक भाषाओं में जारी रखें.
भाषा वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिंदी भाषा का इतिहास वैदिक काल से जुड़ा रहा है, लेकिन समय के साथ इसके नाम बदलते रहे. हिंदी भाषा के उद्भव और विकास की प्रचलित धारणाओं के अनुसार, प्राकृत के अंतिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिंदी का उद्भव माना जाता है. इसे विद्यापति ने 'देसी भाषा' कहा. वहीं हिंदी साहित्य का आरंभ 8वीं शताब्दी से माना जाता है. अपनी उत्पत्ति के बाद से हिंदी भाषा समृद्ध होती गई और इसका रुतबा भी बढ़ता गया. आज हिंदी में कामकाज जोर पकड़ रहा है, और सोशल मीडिया और तकनीक में हिंदी का इस्तेमाल हो रहा है.
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