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This Article is From Jul 26, 2023

नर्मदापुरम : सतपुड़ा के जंगलों से घिरे होशंगाबाद की रेशम से बनी पहचान

सतपुड़ा का नाम सुनते ही कवि भवानी प्रसाद की चंद पंक्तियां याद आती हैं - सतपुड़ा के घने जंगल, ऊंघते अनमने जंगल. जिन घने जंगलों का इस कविता में जिक्र है वो नर्मदापुरम के ही जंगल है.

नर्मदापुरम : सतपुड़ा के जंगलों से घिरे होशंगाबाद की रेशम से बनी पहचान
सतपुड़ा के जंगलों से घिरा हुआ है नर्मदापुरम (होशंगाबाद)...

नर्मदापुरम का पुराना नाम होशंगाबाद है. ये नाम शहर को सुल्तान होशंग शाह घोरी की वजह से मिला था. इसका जिक्र कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों में सन 1405 के आसपास का मिलता है. सुल्तान होशंग शाह घोरी ने हंडिया और जोगा में छोटा  सा किला भी बनवाया था. उस दौर में बैतूल के खेरला गोड राजा से युद्ध के लिए वो होशंगाबाद और हरदा के रास्ते ही वहां पहुचें थे. हाल ही में होशांगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया गया. इस तरह 7 फरवरी 2022 को नर्मदा नदी की गोद में बसे इस जिले को उसकी जीवनदायिनी के नाम से ही नई पहचान मिली.

सतपुड़ा की गोद में बसा

सतपुड़ा का नाम सुनते ही कवि भवानी प्रसाद की चंद पंक्तियां याद आती हैं- सतपुड़ा के घने जंगह, ऊंघते अनमने जंगल. जिन घने जंगलों का इस कविता में जिक्र है वो नर्मदापुरम के ही जंगल है. जिसकी छांव तले नर्मदापुरम जिले में आने वाला पिपरिया, पचमढ़ी जैसी छोटी छोटी जगह स्थित हैं. मध्यप्रदेश अगर हिंदुस्तान का दिल है तो उस दिल को सांसे देने का काम सतपुड़ा के यही घने वन करते हैं. इन्हीं जंगलों को अलग अलग तरह से एक्सप्लोर करने के लिए तवा बांध, मढ़ई, पचमढ़ी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तक पर्यटक बड़ी मात्रा में आते हैं.

गेहूं और सोयाबीन उद्योग

नर्मदा नदी के किनारे बसे इस जिले की मिट्टी बेहद उपजाऊ है. इस मिट्टी में रोटेशन पद्धति से खेती होती है. किसानों की आय प्रमुखतः  गेहूं, सोयाबीन, मूंग बीन, गन्ना, धान पर निर्भर करती है. लेकिन गेहूं के मामले में नर्मदापुरम अग्रणी जिलों में शुमार है. इसके अलावा सोयाबीन के उत्पादन में भी ये देश के सबसे बड़े जिलों में शुमार है.

रेशम उद्योग को मिलेगी नई पहचान

नर्मदापुरम में रेशम उद्योग भी अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में शामिल है. हालांकि बीच में ये उद्योग दम तोड़ने लगा था. लेकिन लॉकडाउन में यही काम लोगों के जीवन का सहारा बना. यहां  स्थित रेशम केंद्र में बाग, टसर, महाराष्ट्र प्रिंट, बिहार टच प्रिंट का फैब्रिक या साड़ियां होती थी. अब  इस पारंपरिक काम को नये दौर के हिसाब से अपडेट करने का काम तेजी से जारी है. इसके लिए जिले के कारीगरों को गुजरात से खास ट्रेनिंग दिलवाई जा रही है.

अन्य जानकारी

  • क्षेत्रफल    -  5408.23 वर्ग कि.मी.
  • वन क्षेत्र -     2229.74 वर्ग मी.
  • कुल आबादी वाले गांव    - 923
  • कुल जनसंख्या  -12,40,975
  • विधानसभा क्षेत्र -4
  • ( नर्मदापुरम, सिवनी मालवा, सुहागपुर और पिपरिया)
  • जनपद पंचायत -7
  • ग्राम पंचायत - 421

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