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This Article is From Jul 12, 2023

हरदा- मध्य प्रदेश के इस ज़िले में दिखती है जनजातीय जीवन की सुंदर झलक

नर्मदा नदी की घाटी में स्थित हरदा जिले में तीन मुख्य नदियां नर्मदा, गंजाल और माचक बहती हैं. हरदा अपने सागौन के घने जंगलों के लिए प्रसिद्ध है. घने जंगलों के यहां बारिश भी काफी अच्‍छी होती है.

हरदा- मध्य प्रदेश के इस ज़िले में दिखती है जनजातीय जीवन की सुंदर झलक

हरदा जिला मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग का एक जिला है. समुद्र तल से 302 मीटर की ऊंचाई पर मध्य प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित यह जिला मुख्य रूप से एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है. यहां की दो-तिहाई जनसंख्या कोरकू और गोंड आदिवासियों की है. हरदा जिला 6 जुलाई 1998 में बनाया गया था, इसे होशंगाबाद जिले से अलग कर जिले का दर्जा दिया गया था. आदिवासी बहुल इलाका होने के बावजूद यहां नगर व्यवस्था काफी पहले से मौजूद है. हरदा में ‘नगर पालिका' की स्थापना  ब्रिटिश राज में 18 मई 1867 को की गई थी. 

सागौन के घने जंगल लाते हैं भरपूर बारिश

नर्मदा नदी की घाटी में स्थित हरदा जिले में  तीन मुख्य नदियां  नर्मदा, गंजाल और माचक बहती हैं. हरदा अपने सागौन के घने जंगलों के लिए प्रसिद्ध है. घने जंगलों के यहां बारिश भी काफी अच्‍छी होती है. जिले में सालाना औसतन 916 मिलीमीटर वर्षा होती है. जिले में जाड़ा, गर्मी, बरसात सभी मौसम देखने को मिलते हैं. गर्मियों में यहां का अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, तो सर्दियों में पारा 06 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क जाता है. 

कई प्राचीन मंदिर, ट्रैकिंग की भी व्यवस्था

हरदा अपनी हरियाली और खुशनुमा मौसम के कारण पर्यटन के लिहाज से भी काफी अच्‍छा है.

आदिवासी बहुल इलाका होने के कारण यहां जनजातीय जीवन की सुंदर झलक देखने को मिल जाती है. इस कारण सांस्कृतिक व सामाजिक अध्ययन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक पसंदीदा जगह है.

राज्य की राजधानी भोपाल से यह लगभग 168 किलोमीटर दूर है और यह सड़क और रेल मार्ग के जरिये जुड़ा हुआ है. हरदा होशंगाबाद और देवास आदि जिलों से भी सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है. हरदा के सभी तीन ब्लॉक मुख्यालय हरदा, खिरकिया और टिमरनी सड़क और रेल मार्ग से भी जुड़े हुए हैं. हवाई मार्ग से जाने के लिए हरदा का करीबी हवाई अड्डा भोपाल एयरपोर्ट है. इसके अलावा इंदौर व जबलपुर एयरपोर्ट से भी यहां पहुंचा जा सकता है. हरदा के पर्यटन स्‍थलों की बात करें, तो यहां रेणुका जी मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, खेत वाली माता मंदिर, जंबेश्‍वर मंदिर, सलकनपुर मंदिर और नेमावाड़ का सूर्य कुंड यहां के सबसे लोकप्रिय स्थल हैं. इसके अलावा श्री सिद्धिविनायक मंदिर, लक्ष्मी नारायण बारा मंदिर व शीतला माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल भी दर्शनीय हैं. ट्रैकिंग के लिए पर्यटक मकरई जाते हैं, जहां इसकी अच्‍छी सुविधाएं उपलब्ध हैं. 

मुगलों से लेकर मराठों और सिंधिया तक का रहा शासन

इस जिले का इतिहास काफी पुराना है, मुगल काल में हंडिया क़स्बा और महमूदाबाद को मिलाकर हरदा कस्बे का गठन किया गया था. पेशवा बालाजी बाजीराव के नेतृत्व में 1742 में मराठों ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर मुगलों के मुस्लिम राज्यपाल को हटा दिया. इसके बाद हरदा काफी समय तक सिंधिया राजघराने के राज्य का हिस्सा रहा.

हरदा भी पिंडारियों और कोरकू आदिवासियों से हमलों का भी काफी समय तक सामना करना पड़ा. तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान 1817 में हरदा डिवीजन का मुख्यालय बन गया.

आंग्ल मराठा युद्ध में मराठों  की हार के बाद यह क्षेत्र 1844 में अंग्रेजों को सौंप दिया गया.

हरदा स्वतंत्रता सेनानी भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल रहे. लोकमान्य तिलक ने 1916 में हरदा का दौरा कर यहां कांग्रेस के संगठन को मजबूत किया. महात्मा गांधी ने भी 1933 में हरिजन कल्याण के लिए हरदा का दौरा कर यहां के स्वयंसेवकों के काम की प्रशंसा की थी. हरदा के प्रो. महेश दत्त जी मेशर गांधी जी के साथ बहुत निकटता से जुड़े थे. 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के दिन एसडीओ. श्री बरेठा ने हरदा के पुलिस स्टेशन पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. स्वतंत्रता के बाद इस कस्बे को भोपाल में मिला दिया गया था, जबकि 1998 में इसे एक पूर्ण जिले का दर्जा दे दिया गया.

हरदा जिला एक नजर में

भौगोलिक स्थिति - 210 53' से 220 36' देशांतर और 760 47' से 770 20' अक्षांश

क्षेत्रफल - 3334 वर्ग कि.मी.

जनसंख्या - 686800 (अनुमानित )

जनसंख्या घनत्व -  220/वर्ग किमी

लिंगानुपात -  932/1000

साक्षरता -  74.04%

नगर निकाय - 4

तहसीलें - 6 (हरदा, हंडिया, टिमरनी, रहटगांव, खिरकिया, सिराली)

विधानसभा क्षेत्र - 2 हरदा, टिमरनी (एसटी) 

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