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This Article is From Jul 12, 2023

दंतेवाड़ा : नक्सलियों से जूझते हुए पेश की मिसाल, शक्तिपीठ भी है यहां

आदिवासी परंपरा से जुड़े इस जिले का नाम यहां स्थित दंतेश्वरी माता मंदिर के नाम पर पड़ा है, जिसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. नक्सलियों के आतंक से प्रभावित इस जिले में शिक्षा की अलख जगाने के लिए पोर्टा केबिन की शुरुआत की गई.

दंतेवाड़ा : नक्सलियों से जूझते हुए पेश की मिसाल, शक्तिपीठ भी है यहां

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला घोर नक्सल प्रभावित जिला है. नक्सली यहां आए दिन हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देते हैं और जिले के विकास कार्यों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. हालांकि इन सब के बीच ये जिला विकास की राह पर बढ़ रहा है और मिसाल पेश कर रहा है. दंतेवाड़ा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक-ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है. आदिवासी परंपरा से जुड़े इस जिले का नाम यहां स्थित दंतेश्वरी माता मंदिर के नाम पर पड़ा है, जिसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. नक्सलियों के आतंक से प्रभावित इस जिले में शिक्षा की अलख जगाने के लिए पोर्टा केबिन की शुरुआत की गई, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ आवास और मुफ्त भोजन भी मुहैया कराया जाता है.

शक्तिपीठ हैं दंतेश्वरी

दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी माता मंदिर शक्तिपीठों में गिना जाता है, माना जाता है कि देवी सती का दांत यहां गिरा था, जिसकी वजह से इस पीठ का नाम दंतेश्वरी पड़ा. पूरे बस्तर क्षेत्र में सर्वाधिक महत्व रखने वाला यह मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है. दंतेश्वरी माता मंदिर 4 भागों में बंटा है. चालुक्य राजाओं ने मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में कराया था, इस मंदिर के चारों भागों में गर्भगृह, महा मंडप, मुख्य मंडप और सभा मंडप शामिल हैं. छह भुजाओं वाली माता की प्रतिमा काले पत्थर से बनी हुई है. होली से पहले यहां नौ दिवसीय फाल्गुन मड़ई नामक उत्सव का आयोजन होता है, जहां आदिवासी संस्कृति और जनजातीय विरासत का झलक देखने को मिलती है. जंगलों, नदियों और झरनों वाला ये जिला अपने अंदर खूबसूरत प्राकृतिक नजारों को समेटे हुए है. बारसुर, बोधघाट, सातधार, गामावाड़ा के स्‍मृति स्‍तंभ यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं.

 नक्सलवाद से लड़ता दंतेवाड़ा

दंतेवाड़ा जिला घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. आए दिन नक्सली विकास कार्यों में बाधा देने के मकसद से यहां सुरक्षाबलों पर हमला करते है. इस साल अप्रैल के महीने में भी नक्सियों ने एक बड़ी घटना को अंजाम दिया था. अप्रैल, 2023 में नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को टारगेट कर आइईडी ब्लास्ट किया, जिसमें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 10 जवान शहीद हो गए और एक आम नागरिक की मौत हुई. इसके कुछ दिन पहले ही नक्सलियों ने बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी पर भी हमला किया था.

यहां बना पहला पोर्टा केबिन

नक्सलियों के आतंक की वजह से क्षेत्र के ढेरों स्कूल बंद कर दिए गए थे, लेकिन बीते दशक में सरकार ने यहां शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूलों को दोबारा खोलने पर जोर दिया. साथ ही यहां पोर्टा केबिन बनाए गए, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर स्नातक तक की शिक्षा और छात्रों के लिए आवास की व्यवस्था की गई है. आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और नक्सलवाद से बचाने के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की है. लाइवलीहुड कॉलेज से लेकर रूरल बीपीओ तक जैसी योजनाओं ने देश भर में मिसाल पेश की है.

लौह अयस्क की खान

बैलाडीला विश्व के सबसे बड़े लौह अयस्क के डिपॉजिट में से एक है. इस लौह अयस्क में आयरन की मात्रा 68 प्रतिशत है जो इसे विश्व का सबसे उम्दा आयरन ओर बनाता है. इसी तरह यूरेनियम, ग्रेनाइट, ग्रेफाइट, चूना पत्थर और संगमरमर के डिपॉजिट भी जिले में हैं.

दंतेवाड़ा जिला एक नज़र में

  • क्षेत्रफल: 3,410.50 वर्ग की॰मी..
  • जनसंख्या : 2,83,479
  • विधानसभा क्षेत्र- 1
  • भाषा तथा बोली : हिन्दी, छत्तीसगढ़ी, गोंड़ी, हलबी
  • गांवः 234

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