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नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की वो परफॉरमेंस जिन्हें दोबारा देखना और सराहना मिलनी चाहिए

Nawazuddin Siddiqui Latest: सुजॉय घोष की इस थ्रिलर फिल्म में नवाज़ुद्दीन ने एक तेज-तर्रार इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसकी मौजूदगी कहानी में यथार्थ और तात्कालिकता का एहसास जोड़ती है.

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की वो परफॉरमेंस जिन्हें दोबारा देखना और सराहना मिलनी चाहिए
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Nawazuddin Siddiqui Latest: नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) ने भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग और खास जगह बनाई है. अपनी व्यापक रेंज, तीव्रता और हर किरदार में पूरी सच्चाई के साथ ढल जाने की अद्भुत क्षमता के लिए वे जाने जाते हैं. भले ही उनके अभिनय को समीक्षकों और दर्शकों, दोनों से सराहना मिली हो, लेकिन कुछ ऐसी भी हैं जिन्हें दोबारा देखा जाना और नए सिरे से सराहा जाना चाहिए. आइए नजर डालते हैं उन  यादगार अभिनय पर, जिनमें नवाज़ुद्दीन ने अमिट छाप छोड़ी.

कहानी (2012)

सुजॉय घोष की इस थ्रिलर फिल्म में नवाज़ुद्दीन ने एक तेज-तर्रार इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसकी मौजूदगी कहानी में यथार्थ और तात्कालिकता का एहसास जोड़ती है. विद्या बालन की परतदार मिस्ट्री के बीच एक सख्त और बेबाक अधिकारी के रूप में उनकी प्रस्तुति उनके करियर का एक अहम मोड़ साबित हुई और इसने दिखाया कि वह दमदार कलाकारों के सामने भी पूरी मजबूती से खड़े रह सकते हैं.

तलाश: द आंसर लाइज विदिन (2012)

रीमा कागती की इस मनोवैज्ञानिक ड्रामा फिल्म में नवाज़ुद्दीन एक लंगड़े स्ट्रीट हसलर के किरदार में नजर आए, जो एक जटिल अपराध कथा में उलझ जाता है. आमिर खान, रानी मुखर्जी और करीना कपूर खान जैसे सितारों से भरी कहानी में भी दर्शकों की सहानुभूति बटोरने में सफल रही.

मांझी – द माउंटेन मैन (2015)

इस बायोग्राफिकल ड्रामा में नवाज़ुद्दीन ने दशरथ मांझी के जीवन को जीवंत किया. वह व्यक्ति जिसने अकेले अपने दम पर एक पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया. उनकी कच्ची, जुझारू और ईमानदार  अभिनय ने संघर्ष, त्याग और प्रेम की भावना को गहराई से पकड़ लिया. यह भूमिका इस बात का प्रमाण है कि वह अपनी अदाकारी के बल पर पूरी फिल्म को कंधों पर उठा सकते हैं.

मंटो (2018)

नंदिता दास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में साहित्यिक दिग्गज सआदत हसन मंटो की भूमिका निभाते हुए नवाज़ुद्दीन ने एक बेहद सूक्ष्म और परतदार परफॉरमेंस दी, जिसमें कलाकार और कला के बीच की सीमाएं धुंधली हो जाती हैं. मंटो के संघर्ष, प्रतिभा और सामाजिक पाखंड के खिलाफ उनके विद्रोह को उन्होंने इतनी सच्चाई से पेश किया कि यह परफॉरमेंस भारतीय सिनेमा की बेहतरीन अदाकारी में गिनी जाने लगी और एक गहरे कलाकार के रूप में उनकी पहचान और मजबूत हुई.

ठाकरे (2019)

बालासाहेब ठाकरे के किरदार में ढलते हुए नवाज़ुद्दीन ने शिवसेना संस्थापक की करिश्माई और प्रभावशाली आभा दोनों को सटीकता से पकड़ा. उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और एक विशाल राजनीतिक व्यक्तित्व को आत्मसात करने की क्षमता ने एक बार फिर साबित किया कि वह अपनी पीढ़ी के सबसे दिग्गज अभिनेताओं में क्यों गिने जाते हैं.

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