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Exclusive: 'Akhand 2' में फिर जीवंत हुआ श्रीकृष्ण का तेज, Sarvadhaman की साधना और संघर्ष का अनकहा सफर

Sarvadhaman D. Banerjee Exclusive: अपने अभिनय सफर को याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि श्रीकृष्ण का किरदार उनके लिए सिर्फ एक भूमिका नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन बन गया था. उन्होंने बताया कि इस किरदार के बाद उन्होंने करीब 20 से 22 साल का समय पूरी तरह मेडिटेशन और आत्म-साधना को समर्पित कर दिया.

Exclusive: 'Akhand 2' में फिर जीवंत हुआ श्रीकृष्ण का तेज, Sarvadhaman की साधना और संघर्ष का अनकहा सफर
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Sarvadhaman D. Banerjee Exclusive: टेलीविजन पर भगवान श्रीकृष्ण के रूप में अमिट छाप छोड़ने वाले अभिनेता सर्वदमन डी. बनर्जी (Sarvadhaman D. Banerjee) एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह है, उनकी आने वाली फिल्म अखंडा 2 (Akhand 2) जिसमें वह एक अहम और प्रभावशाली किरदार में नजर आए हैं. इसी सिलसिले में सर्वदमन डी. बनर्जी ने NDTV के साथ एक खास बातचीत में अपने जीवन, करियर और आध्यात्मिक यात्रा के कई अनछुए पहलुओं पर खुलकर बात की.

श्रीकृष्ण का किरदार उनके लिए

अपने अभिनय सफर को याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि श्रीकृष्ण का किरदार उनके लिए सिर्फ एक भूमिका नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन बन गया था. उन्होंने बताया कि इस किरदार के बाद उन्होंने करीब 20 से 22 साल का समय पूरी तरह मेडिटेशन और आत्म-साधना को समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा कि साल 2000 के बाद उन्होंने जानबूझकर सिनेमा से दूरी बनाई, क्योंकि वह खुद को भीतर से समझना और आध्यात्मिक रूप से मजबूत करना चाहते थे. उन्होने आगे बताया कि इतने लंबे अंतराल के बाद उन्होंने 2022 में श्रीदेवी की एक फिल्म से वापसी की. यह वापसी उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद खास थी. उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने लौटना आसान नहीं था, लेकिन अनुभव और साधना ने उनके अभिनय को और गहराई दी. उन्होंने यह भी साझा किया कि तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में उनका सफर काफी समृद्ध रहा है. उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिन्हें आज क्लासिक और कल्ट सिनेमा का दर्जा मिला है. इन फिल्मों में निभाए गए दमदार किरदारों के लिए उन्हें हाल ही में सम्मान और पुरस्कार से भी नवाजा गया, जिसे वह अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि मानते हैं.

साउथ के मेगास्टार

उन्होंने अनुभवों को साझा करते हुए  बताया कि उन्होंने साउथ के मेगास्टार चिरंजीवी के साथ भी काम किया है. उन्होंने मुस्कुराते हुए उस किस्से को याद किया जब अचानक उन्हें फोन आया और कहा गया कि एक फिल्म है, आपको तुरंत आना होगा. उन्होंने कहा कि उस दौर में इंडस्ट्री में भरोसा और काम के प्रति समर्पण सबसे बड़ी पहचान हुआ करता था. जब उनसे पूछा कि उन्नाव, उत्तर प्रदेश से निकलकर मुंबई तक का सफर और फिर श्रीकृष्ण का ऐतिहासिक किरदार उन्हें कैसे मिला, तो उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को विस्तार से याद किया. अभिनेता ने बताया कि उन्होंने पांच साल तक एक एक्टिंग इंस्टिट्यूट से प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली. इसके बाद कुछ समय मुंबई में बिताया, लेकिन उन्हें लगा कि उन्हें खुद को और निखारने की जरूरत है. इसके बाद वह मद्रास चले गए, जहां उन्हें फिल्मों में लगातार काम मिलने लगा. हालांकि, उन्होंने बताया कि 1988 और 1989 में तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री लगभग दो साल तक ठप हो गई थी, जिसकी वजह से शूटिंग और प्रोजेक्ट्स रुक गए. उस मुश्किल दौर के बाद वह दोबारा मुंबई लौटे, जहां किस्मत ने एक बार फिर करवट ली. मुंबई लौटने के बाद उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का वह किरदार ऑफर हुआ, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिला दी. उन्होंने कहा कि इस रोल को पूरी श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ स्वीकार किया, क्योंकि वह जानते थे कि यह किरदार सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा हुआ है.

अब तक के सफर का

अब फिल्म अखण्ड 2 के जरिए एक्टर एक बार फिर बड़े पर्दे पर दिखाई दिए हैं. उनका मानना है कि यह फिल्म उनके अब तक के सफर का एक नया अध्याय है. दर्शकों को उनसे एक बार फिर गंभीर, संयमित और आत्मिक ऊर्जा से भरा अभिनय देखने को मिलेगा. अभिनेता का कहना है कि सिनेमा और साधना, दोनों ने उन्हें जीवन को अलग नजरिए से देखने की सीख दी है, ‘ अखंड 2' उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि अनुभवों और विश्वासों का संगम है.

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