छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधनों की लूट खसोट करने वाले खनिज माफियाओं के खिलाफ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है. मुख्यमंत्री के कड़े और साफ निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन और खनिजों के अवैध भंडारण के खिलाफ एक व्यापक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. सरकार के इस ताबड़तोड़ एक्शन से माफियाओं के हौसले पस्त हो चुके हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल अप्रैल और मई 2026 के दो महीनों के भीतर ही पूरे सूबे में रिकॉर्ड 1,747 मामलों में कार्रवाई की गई है. इस कार्रवाई के तहत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए माफियाओं की जेब पर सीधा प्रहार किया है और 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की जुर्माना राशि सरकारी खजाने में जमा की गई.
रायपुर और बलौदा बाजार बने अवैध धंधे के गढ़
इस विशेष अभियान के दौरान जो मामले दर्ज किए गए हैं, इसने प्रशासन की मुस्तैदी और माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है. दर्ज किए गए कुल मामलों में अवैध परिवहन के सबसे ज्यादा 1,487 मामले दर्ज हुए हैं. इसके अलावा, अवैध उत्खनन यानी जमीन का सीना चीरकर बिना अनुमति खनन करने के 231 मामले सामने आए हैं. वहीं, अवैध भंडारण यानी नियमों को ताक पर रखकर खनिजों को छिपाकर रखने के 29 प्रकरण बनाए गए हैं.
इन जिलों में सबसे ज्यादा मामले हुए दर्ज
अगर जिलों की बात करें, तो अवैध उत्खनन के सबसे अधिक 44 मामले बलौदाबाजार और भाटापारा जिले में दर्ज किए गए. वहीं, राजधानी रायपुर अवैध परिवहन और भंडारण के मामले में सबसे आगे रही है. रायपुर में अवैध परिवहन के सबसे ज्यादा 173 मामले दर्ज किए गए, जबकि जांजगीर-चांपा 162 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर रहा. अवैध भंडारण के भी सबसे ज्यादा 8 मामले अकेले रायपुर में ही पकड़े गए हैं.
वसूली के मामले में रायपुर जिला प्रदेश में अव्वल
खनिज विभाग द्वारा की गई कुल जुर्माने की राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान पर रहा है. अकेले रायपुर से अवैध परिवहन के एवज में रिकॉर्ड 54.69 लाख रुपये और अवैध भंडारण के मामले में 12.58 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया.
दंतेवाड़ा में भी भारी जुर्माना
दूसरी तरफ, अवैध उत्खनन (माइनिंग) के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई बस्तर अंचल के दंतेवाड़ा जिले में देखने को मिली है, जहां माफियाओं से सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है.
अब कम से कम 25 हजार का झटका
भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम कसने के लिए साय सरकार ने 'गौण खनिज नियमों' को पहले से कहीं ज्यादा सख्त और कड़ा बना दिया है. नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी छोटे से छोटे मामले में भी न्यूनतम 25 हजार रुपये से कम की जुर्माने की राशि स्वीकार नहीं की जाएगी.
नए नियमों की मुख्य बातें
अवैध परिवहन पर दोहरा प्रहार
अब अवैध परिवहन करते हुए पकड़े जाने पर प्रति टन 2 हजार रुपये प्रशमन शुल्क तो देना ही होगा, साथ ही जब्त किए गए पूरे खनिज का वास्तविक मूल्य भी माफिया को चुकाना पड़ेगा.
रेत माफिया पर नकेल
यदि ट्रैक्टर से अवैध रूप से रेत का परिवहन करते पाया गया, तो कम से कम 25 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका जाएगा और रेत की कीमत अलग से वसूल की जाएगी.
वाहन छुड़ाना हुआ मुश्किल
जब्त की गई गाड़ियों और पोकलेन-जेसीबी मशीनों को छुड़ाने के लिए अब कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. मालिकों को वाहन छुड़ाने के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की भारी सुरक्षा राशि पहले न्यायालय में जमा करनी होगी, उसके बाद ही गाड़ी छूटेगी.
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प्रशासन के इस चौतरफा एक्शन और नियमों में हुए बड़े बदलावों से साफ है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के भीतर अवैध माइनिंग सिंडिकेट की कमर पूरी तरह से टूटने वाली है.
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