‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन: ‘वंदे मातरम्’ उद्घोष के साथ समाज की मुख्य धारा में लौटे 210 माओवादी

Historic Naxal Surrender: यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं.

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Including Naxal commander Rupesh 210 Maoist return to mainstream, Jagdalpur, CG

छत्तीसगढ़ सरकार के व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद और विकास पर केंद्रित प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में शुक्रवार को नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन' कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है.

यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं.

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गौरतलब है एक साथ 210 नक्सलियों का आत्म-समर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है. लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा.  

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सरेंडर कर चुके नक्सल कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार भी सरकार के सुपुर्द किए हैं. इनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं.  यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है. एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है.

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जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में आयोजित आत्म-समर्पण कार्यक्रम में आत्म समर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया. उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया.

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निः संदेह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है. पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है.

मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं. इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में जीवन जीने का संकल्प लिया है.

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीजीपी अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है. उन्होंने कहा कि, जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे.

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कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्म-समर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई. राज्य सरकार युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें.

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मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सह अस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है. जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे. कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की.

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हिंसा छोड़ विकास और राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान की ली प्रतिज्ञा

उल्लेखनीय है इतिहास में 17 अक्टूबर, 2025 का दिन तारीख की तरह याद रखा जाएगा. जब ‘वंदे मातरम्' की गूंज के साथ सामज की मुख्य धारा में लौटे 210 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर नहीं कहानी लिखी. यह दिन बस्तर के, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बनेगा.

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