Children Inspiring Story: राजधानी रायपुर में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल रामेन डेका ने तिरंगा झंडा फहराया और परेड की सलामी ली. इस अवसर पर राज्यपाल रामेन डेका ने पांच बहादुर बच्चों को “राज्य वीरता पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया. इन बच्चों ने संकट की घड़ी में अद्भुत साहस, सूझबूझ और मानवता का परिचय देते हुए अनमोल जिंदगियों को बचाया. उनके इस प्रेरणादायक कार्य को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया. ऐसे में यहां जानते हैं इन बच्चों के बारे में...

आर्यन और राकेश ने बचाई डूबते बच्चे की जान
रायगढ़ के गांधी नगर में बालसमुंद नाला के किनारे 24 सितंबर 2025 की शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. खेलते समय 9 वर्षीय दादू मिंज अचानक नाले में गिर गया और डूबने लगा. यह दृश्य देखकर वहीं मौजूद आर्यन खेश और राकेश मिंज ने बिना समय गंवाए नाले में छलांग लगा दी. दोनों बच्चों ने मिलकर दादू मिंज को बाहर निकाला, लेकिन वो बेहोश हो चुका था और उसके पेट में पानी भर गया था. आर्यन और राकेश ने सूझबूझ दिखाते हुए उसके पेट और छाती पर दबाव देकर पानी बाहर निकाला, जिससे उसकी सांसें लौट आईं और उसकी जान बच सकी.

आशु और मेहुल ने बचाई जान
धमतरी के रूद्री बैराज में 28 मार्च 2025 को संतोष देवांगन अपने बेटे आशु और मेहुल के साथ नहाने गए थे. संतोष देवांगन अचानक गहरे पानी में गिरकर डूबने लगे. यह देखकर उनके पुत्र आशु देवांगन और भतीजे मेहुल देवांगन ने बड़ी बहादुरी से उन्हें हाथ पकड़कर गहरे पानी से उथले पानी की ओर खींचा. शरीर भारी होने के बावजूद बच्चों ने पूरी ताकत लगाकर उन्हें पानी के किनारे तक पहुंचाया. इसके बाद राहगीरों की मदद से एम्बुलेंस बुलवाई गई और उन्हें जिला अस्पताल धमतरी में भर्ती कराया गया, जिससे समय रहते उपचार हो सका और उनकी जान बच गई.

7 फीट गड्ढे में गिरे मासूम की बचाई जान
हेमाद्रि चौधरी 2 अक्टूबर 2025 को बालोद जिले के ग्राम मटिया में माता रानी विसर्जन देखने गई थी. दशहरा उत्सव के दौरान 6 वर्षीय ईशान यादव 7 फ़ीट गहरे पानी में डूबने लगा. यह देख हेमाद्री चौधरी ने तालाब में कूदकर बच्चे को बाहर निकाला और उसे सुरक्षित बचा लिया.उसकी बहादुरी से एक परिवार का चिराग बुझने से बच गया.

इन पांचों बच्चों आर्यन खेश, राकेश मिंज, आशु देवांगन, मेहुल देवांगन और हेमाद्री चौधरी ने यह साबित कर दिया कि बहादुरी उम्र की मोहताज नहीं होती.सही समय पर दिखाई गई हिम्मत और सूझबूझ से किसी की पूरी जिंदगी बचाई जा सकती है। गणतंत्र दिवस के मंच से जब इन बच्चों को सम्मानित किया गया, तो यह केवल उनका नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का पल था।