Naxlites Wish To Surrender: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के विरुद्ध जारी अभियान के बीच एक बड़ी सफलता की खबर सामने आ रही है. भाकपा (माओवादी) के BBM डिवीजन (बलांगीर-बरगढ़- महासमुंद) के सचिव विकास और उनके साथ 14 अन्य सक्रिय कैडरों ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर आत्म-समर्पण की इच्छा जताई है.
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बदली परिस्थितियों के कारण लिया सरेंडर का निर्णय
नक्सली नेता विकास ने गृह मंत्री विजय शर्म को लिखे पत्र में स्वीकार किया है कि देश और दुनिया की वर्तमान आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अब दीर्घकालीन जनयुद्ध और सशस्त्र संघर्ष जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है. पत्र में उल्लेख किया गया है कि पार्टी के भीतर भी इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि अलग-अलग सरेंडर करने के बजाय पूरी पार्टी को ही सशस्त्र संघर्ष त्याग देना चाहिए.

गृह मंत्री विजय शर्मा को भेजा गया नक्सलियों का पत्र
2 अथवा 3 मार्च तक सरेंडर कर सकते हैं नक्सली
रिपोर्ट के मुताबिक सशस्त्र माओवादियों ने सुरक्षा की गारंटी मांगते हुए गृह मंत्री से रेडियो के माध्यम से आह्वान करने की अपील की है. उनका कहना है कि वो सरकारी आश्वासन के बाद ही सरेंडर के लिए बाहर आएंगे. पत्र के अनुसार नक्सली 2 या 3 मार्च तक सरेंडर कर सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वो महासमुंद जिले में सरेंडर करना चाहते हैं और इसके लिए पूर्व माओवादी सागर के माध्यम से रिसीविंग का प्लान बनाने का सुझाव दिया है.
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15 नक्सलियों की टीम में बस्तर के कैडर शामिल
सरेंडर की इच्छा जताने वाले इन 15 नक्सलियों में संगठन के विभिन्न पदों के पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें 3 DVC सदस्य, 5 AC सदस्य और 7 पार्टी सदस्य (PM) हैं. बड़ी बात यह है कि इनमें से 14 नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि सचिव विकास तेलंगाना का है. उन्होंने ओडिशा के बजाय छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि अधिकांश साथी छत्तीसगढ़ के ही मूल निवासी हैं.
सरेंडर के लिए तैयार नक्सलियों ने रखे 3 सुझाव
गौरतलब है नक्सलियों ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में सरेंडर के लिए तीन सुझाव दिए हैं. उनकी मांग है कि सरकार की तीन घोषणाओं के बाद वो संघर्ष का रास्ता छोड़ सकते हैं. सशस्त्र संघर्ष छोड़ने पर माओवादी पार्टी को एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देने, माओवादियों पर लगे पुलिस केस रद्द करने और जेल में बंद साथियों को रिहाई और उन्हें संविधान के दायरे में काम की अनुमति दी जाए.
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