Pregnant Police Constable Arrested: छत्तीसगढ़ के दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र से पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है. चोरी के एक प्रकरण में जब्त की गई कीमती सोने की ज्वेलरी के गबन के आरोप में बर्खास्त प्रधान महिला आरक्षक मोनिका गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मोनिका इस समय 9 महीने की गर्भवती बताई जा रही हैं और अब उन्हें जेल में ही बच्चे को जन्म देना पड़ सकता है. उन्होंने हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका भी लगाई थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली.
कैसे शुरू हुआ मामला?
दरअसल, 4 जुलाई 2022 को दुर्ग के सिंधिया नगर स्थित सोनल द्विवेदी के घर से अज्ञात चोर ने 79 ग्राम सोने की ज्वेलरी और करीब 32 हजार रुपये नकद चोरी कर लिए थे. पीड़िता ने इसकी शिकायत मोहन नगर थाने में दर्ज कराई. उस समय थाने में तैनात प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता ने ही शिकायत दर्ज की और जांच शुरू की.
चोर पकड़ने के बाद भी गहने नहीं लौटे
जांच के दौरान 30 जून 2023 को मोनिका गुप्ता ने आरोपी चोर को गिरफ्तार करने और उसके पास से चोरी का सामान बरामद करने की बात कही. बरामद ज्वेलरी की कीमत करीब 2.5 लाख रुपये बताई गई. आरोप है कि बरामद किए गए जेवर पीड़िता को सौंपने के बजाय मोनिका ने उन्हें अपने पास रख लिया. उन्होंने उच्च अधिकारियों को यह बताया कि जब्त जेवरात आरक्षी केंद्र की अलमारी में सुरक्षित रख दिए गए हैं, जबकि आरोप के मुताबिक वे वहां जमा ही नहीं किए गए थे.
जेवर जमा ही नहीं किए गए
इसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई. जांच में यह बात सामने आई कि ज्वेलरी आरक्षी केंद्र में जमा नहीं कराई गई थी और कथित तौर पर वह मोनिका के पास ही रही. बताया गया कि पीड़िता की शिकायत के बावजूद जेवर वापस नहीं लौटाए गए. विभाग ने मोनिका से कई बार स्पष्टीकरण भी मांगा, लेकिन आरोप है कि उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
FIR, फरारी और गिरफ्तारी
अंततः 4 मार्च 2025 को मोहन नगर थाने में मोनिका गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई. FIR के बाद से वह लगातार फरार बताई गईं. फिर 2 फरवरी 2026 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया. इसी बीच यह भी सामने आया कि वह 9 माह की गर्भवती हैं.
नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला
मोनिका गुप्ता को लेकर यह भी कहा गया है कि उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ गृह (पुलिस) विभाग में पहले भी ठगी का मामला सामने आ चुका है. जांच में आरोप साबित होने की बात कही गई कि उन्होंने एक व्यक्ति से उसकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध राशि ली और अपने पद का दुरुपयोग किया. आरोपपत्र और अंतिम स्मरण पत्र के बावजूद उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा, ऐसा विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज होने का दावा किया गया है.