Cherchera Tihar: छेरछेरा (Cherchera) छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में मनाया जाता है. यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है. फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है. छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है. इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए दरवाजे पर पहुंचकर अन्न या दान मांगते हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकपर्व छेरछेरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं. उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है. नई फसल घर आने की खुशी में यह पर्व पौष मास की पूर्णिमा को बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है.
छेरछेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा....
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) January 3, 2026
छत्तीसगढ़ के लोक परब, दान-पुन्न के तिहार छेरछेरा के जम्मो प्रदेशवासी मन ला गाड़ा-गाड़ा बधई अउ सुभकामना।
भगवान ले मोर प्रार्थना हे कि आप जम्मोझन के धान के कोठी भरे रहय। pic.twitter.com/fg3zgikOsk
मां शाकंभरी जयंती का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिन मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है, जो अन्न, प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश देती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण की थी. इसी परंपरा के अनुरूप छेरछेरा पर्व पर धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल एवं अन्य अन्न का दान कर लोग परस्पर सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देते हैं.
वहीं छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया. इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला.
मंत्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है. छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है. ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं. इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया. गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी. बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे.
"छेरछेरा, माई कोठी के धान ल हेर हेरा"
— Raipur (@RaipurDistrict) January 3, 2026
छत्तीसगढ़ के लोक परब, दान-पुन के तिहार छेरछेरा के जम्मो भाई बहिनी, लईका, सियान सब्बो झन ला गाड़ा-गाड़ा बधई
अन्न दान के महापरब ह आप सब्बो झन के जिनगी म खुसहाली लावय! #छेरछेरा #chherchhera #raipurdistrict pic.twitter.com/1itkMyytXN
“छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा...” का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें.इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है. यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है.
यह भी पढ़ें : MP Anganwadi Bharti: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के 4767 पदों पर भर्ती, जानिए कहां और कैसे करें आवेदन
यह भी पढ़ें : MP में खेती-किसानी का कटोरा है मालवा; CM मोहन ने खाचरोद को प्रोसेसिंग पार्क और हाईवे की दी सौगात
यह भी पढ़ें : Homestays in Rewa: रीवा जिले में ग्रामीण होमस्टे का नया अध्याय, पर्यटन को मिला दोगुना मजा
यह भी पढ़ें : KBC 17: बीजापुर में पोस्टेड CRPF जवान ने रचा इतिहास; 'करोड़पति' के जवाब सुन Big B ने डिनर पर बुलाया