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CD Case: भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, CBI ट्रायल की कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक; क्या है मामला

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीडी कांड में पूर्व सीएम भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है. हाईकोर्ट ने रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में चल रहे ट्रायल पर अंतरिम रोक लगा दी है. 

CD Case: भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, CBI ट्रायल की कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक; क्या है मामला
Bhupesh baghel gets interim relief from chhattisgarh hc in cd case

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित  सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है. गुरुवार 30 जुलाई को जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने भूपेश बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए रायपुर स्थित सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत में चल रही ट्रायल की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी. इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में सीबीआई और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं. अब अगली सुनवाई तक विशेष अदालत में इस मामले में आगे कोई न्यायिक कार्रवाई नहीं होगी.

जनवरी 2026 के आदेश को दी गई चुनौती

भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट में 24 जनवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मार्च 2025 में मिले डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) आदेश को निरस्त कर उनके खिलाफ दोबारा आरोप तय कर ट्रायल चलाने का रास्ता साफ किया गया था. विशेष अदालत ने सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़नी चाहिए.

हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?

भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं (हर्षवर्धन पनगरिहा, मयंक जैन) ने दलील दी कि पुनरीक्षण अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर न केवल डिस्चार्ज आदेश को रद्द किया, बल्कि आरोपों की प्रकृति और साक्ष्यों पर भी ऐसी टिप्पणियां कर दीं, जो मूल ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय हैं. याचिका में यह भी कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और पुनरीक्षण अदालत का आदेश कानून सम्मत नहीं है. इन दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की.

क्या है पूरा सीडी कांड?

यह पूरा मामला वर्ष 2017 में सामने आए कथित सीडी प्रकरण से जुड़ा है. आरोप है कि तत्कालीन भाजपा सरकार में मंत्री रहे राजेश मूणत की कथित अश्लील सीडी तैयार कर उसे सार्वजनिक किया गया, ताकि उनकी राजनीतिक छवि धूमिल की जा सके. मामला सामने आने के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. जांच के दौरान सीबीआई ने भूपेश बघेल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के उपयोग और अश्लील सामग्री के प्रकाशन व प्रसारण से संबंधित विभिन्न धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी.

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मामले की कानूनी टाइमलाइन

  • 2017: कथित सीडी सामने आने के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज किया.
  • मार्च 2025: विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त साक्ष्य न मानते हुए भूपेश बघेल को डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) कर दिया.
  • 24 जनवरी 2026: सीबीआई की विशेष अदालत ने डिस्चार्ज आदेश रद्द कर ट्रायल चलाने का आदेश दिया.
  • 30 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रायल की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई और जवाब तलब किया.

क्या भूपेश बघेल को क्लीन चिट मिल गई है?

नहीं, हाईकोर्ट का यह आदेश केवल एक अंतरिम राहत है. अदालत ने न तो भूपेश बघेल को पूरी तरह आरोपमुक्त घोषित किया है और न ही मामले को खारिज किया है. फिलहाल केवल सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही ट्रायल की आगे की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है. इस मामले का अंतिम फैसला हाईकोर्ट द्वारा सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही होगा. 

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