विज्ञापन

VIDEO: सामाजिक मंच पर सियासत! भरी सभा में भूपेश बघेल को टोका, ‘राजनीति न करने’ की हिदायत

बालोद में आयोजित कुर्मी क्षत्रिय समाज के सम्मेलन में उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को किसानों के मुद्दों पर बोलते हुए ‘राजनीति न करने’ की हिदायत दी गई. मंच पर हुई इस नोकझोंक का वीडियो सामने आने के बाद सोशल और सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है.

VIDEO: सामाजिक मंच पर सियासत! भरी सभा में भूपेश बघेल को टोका, ‘राजनीति न करने’ की हिदायत

Bhupesh Baghel Controversy: छत्तीसगढ़ में आयोजित हुई एक सभा में कुछ ऐसा हुआ, जिसने एक सामाजिक कार्यक्रम को सीधे सियासी बहस के केंद्र में ला खड़ा किया. बालोद जिले के सरदार पटेल मैदान में आयोजित कुर्मी क्षत्रिय समाज के वार्षिक सम्मेलन में उस वक्त माहौल अचानक बदल गया, जब मंच से किसानों के मुद्दों पर बोल रहे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बीच भाषण में ही टोक दिया. इसके बाद मंच पर ही तीखी नोकझोंक देखने को मिली. 

सम्मेलन में गरमाया माहौल

दरअसल, बालोद जिला मुख्यालय में हुए इस सम्मेलन में कुर्मी क्षत्रिय समाज के बड़ी संख्या में लोग जुटे थे. कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आमंत्रित किया गया था. सभा सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी, तभी भूपेश बघेल ने मंच से किसानों की परेशानियों और राज्य सरकार की धान खरीदी नीति पर अपनी बात रखनी शुरू की.

मंच से आई ‘राजनीति न करने' की आवाज

भूपेश बघेल का भाषण जैसे ही किसानों के मुद्दों पर केंद्रित हुआ, मंच पर मौजूद समाज के एक व्यक्ति ने उन्हें बीच में ही टोक दिया. साफ शब्दों में कहा गया कि यहां राजनीतिक बातें न की जाएं. यह टोकना सबके लिए अचानक था और इसी ने विवाद की चिंगारी भड़का दी.

भूपेश बघेल का तीखा जवाब

टोकने पर भूपेश बघेल नाराज हो गए. मंच से ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे राजनीति नहीं कर रहे, बल्कि किसानों के हित की बात कर रहे हैं. उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि यदि सम्मान नहीं दे सकते तो किसी को कार्यक्रम में बुलाना ही नहीं चाहिए. उनके इस जवाब के बाद सभा में सन्नाटा और हलचल दोनों देखने को मिले.

‘मिर्ची लग रही है' वाला बयान

मामला तब और गर्म हो गया जब भूपेश बघेल ने आगे कहा कि मंच पर बैठे दूसरी पार्टी के लोगों को उनकी बातें सुनकर मिर्ची लग रही है. इस बयान के बाद साफ हो गया कि अब यह विवाद सिर्फ सामाजिक दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुली राजनीतिक बहस में बदल चुका है.

सामाजिक मंच से सियासी अखाड़े तक

जिस सम्मेलन का मकसद समाज से जुड़ी बातों पर चर्चा करना था, वह कुछ ही पलों में राजनीतिक बयानबाज़ी का मंच बन गया. दर्शकों में कुछ लोग भूपेश बघेल के समर्थन में दिखे, तो कुछ को लगा कि सामाजिक कार्यक्रम में इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए थीं.

किसानों की बात या राजनीति?

अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसानों की समस्याओं पर बात करना भी राजनीति की श्रेणी में आ चुका है? या फिर राजनीतिक असहजता के चलते एक सामाजिक मंच पर रखी गई बातों को सियासत का रंग दे दिया गया? इस घटना ने सामाजिक मर्यादा और राजनीतिक अभिव्यक्ति के बीच की उस पतली लकीर को फिर से चर्चा में ला दिया है.

MPCG.NDTV.in पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार,लाइफ़स्टाइल टिप्स हों,या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें,सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Close