Chhattisgarh Dhan Kharidi News: सूरजपुर (Surajpur) में इन दिनों प्रशासन की टीम बेहद सख्त नजर आ रही है, जिले के अलग-अलग धान खरीदी केंद्रों में जाकर सत्यापन की कार्रवाई कर रहे हैं. ऐसे में हेराफेरी करने वाले खरीदी केंद्रों के प्रभारी में हड़कंप मचा हुआ है. वहीं, प्रशासन भी गड़बड़ी करने वाले प्रभारी पर लगातार कार्रवाई करते नजर आ रही है. इसी क्रम में सूरजपुर के तीन धान खरीदी केंद्रों में प्रशासन ने छापेमारी कार्रवाई की, जिसमें लगभग 5 करोड़ 75 लाख रुपए की धान गायब मिले. वहीं, पूर्व में भी लगभग 80 लाख रुपये के धान सांवारावा खरीदी केंद्र से गायब मिले थे.
इन समितियों पर मिली गड़बड़ी
सूरजपुर कलेक्टर एस जयवर्धन के निर्देशन में सभी धान खरीदी केंद्रों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो खरीदी केंद्रों पर निगरानी रखते हैं. इसी क्रम में जब राजस्व खाद्य एवं मंडी की टीम प्रतापपुर के टुकूडाड पहुंची, तो बड़ी गड़बड़ी सामने आई. सत्यापन के दौरान 6 तौल कांटों पर वजन से काफी कम वजन बता रहा था. किसानों से अधिक मात्रा में खरीदी किया जा रहा था. साथ ही एंट्री डाटा से 6412.8 क्विंटल धान कम मिला, जिसकी कीमत 1 करोड़ 98 लाख रुपये बताई जा रही है. वहीं, भैयाथान ब्लॉक के शिवप्रसाद नगर से 5552 क्विंटल धान कम मिले, जिसकी कीमत 1 करोड़ 72 लाख रुपये बताई जा रही है. साथ ही मुख्यालय सूरजपुर धान खरीदी केंद्र में सत्यापन किया गया, तो 6610.4 क्विंटल धान गायब मिले, जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ 5 लाख रुपये बताई जा रही है. वहीं, पूर्व में भी सावारावा धान खरीदी केंद्र में लगभग 80 लाख रुपये की धान कम पाई गई थी. इन सभी समितियों का सत्यापन कर आगे की कार्रवाई में खाद्य विभाग जुटी हुई है.

बिना धान खरीदे हुआ भुगतान
वहीं, इस बड़े गड़बड़ी के सामने आने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि इन समितियां में फर्जी तरीके से किसानों के खाते में धान की बिक्री दिखा कर भुगतान किया गया है. यह हम इसलिए कह रहे हैं , क्योंकि अगर समिति में करोड़ों की धान गायब है, तो समिति में धान आया ही नहीं है और फर्जी तरीके से किसानों के खाते में चढ़ा दिए गए और भुगतान भी हो गई है.
अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं
वहीं, आपको बता दें कि धान खरीदी की शुरुआत होते ही राज्य सरकार की ओर से कई नियम बनाए गए थे, जिनमें किसान के खेत में जाकर धान का सत्यापन करना. साथी टोकन काटने से पहले इसकी जांच करना और धान खरीदी केंद्रों में सीसीटीवी और किसान अपने धान को लेकर जब खरीदी केंद्र पहुंचता है, तो उस वक्त किसान के गाड़ी नंबर का इंट्री करना, ऐसे कई बड़ी नियम बनाए गए थे, ताकि कोई भी गड़बड़ी न किया जा सके. बावजूद इसके करोड़ों के धान गायब मिलना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि सभी नियमों को ताक पर रखकर समिति प्रबंधक और ऑपरेटर इस कालाबाजारी में संलिप्त हैं. बिना उनकी मिली भगत के इतना बड़ा गड़बड़ी करना संभव नहीं है.
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वहीं, अब यह देखने वाली बात होगी कि भौतिक सत्यापन में मिली करोड़ों की गड़बड़ी में आगे कब तक जांच होती है और क्या कुछ कार्रवाई की जाती है. क्या संलिप्त अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई होती है और ऐसे फर्जी किसान जिन्हें भुगतान किया गया है, उनकी भी पहचान करने में अधिकारी सफल हो पाते हैं या नहीं. फिलहाल, जिले में करोड़ों की गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद आम लोगों में चर्चा का विषय बना है कि इतने नियम होने के बावजूद बड़ा घोटाला कैसे हो गया और क्या सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर खानापूर्ति की जाएगी.
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